कार्बन डेटिंग विधि किसकी आयु निर्धारित करने के लिए अपनाई जाती है?

कार्बन डेटिंग विधि किसकी आयु निर्धारित करने के लिए अपनाई जाती है?
हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”!  🎉  जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है। कार्बन डेटिंग विधि जीवाश्मों की आयु निर्धारित करने के लिए अपनाई जाती है। कार्बन डेटिंग विधि जिसे रेडियोकार्बन डेटिंग भी कहा जाता है, पुरातत्व, भूविज्ञान और जीवाश्म विज्ञान में आयु निर्धारण की एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तकनीक है। इस विधि का उपयोग मुख्यतः प्राचीन जैविक पदार्थों जैसे लकड़ी, हड्डियाँ, कोयला, बीज, कपड़ा और जीवाश्मों के अवशेष की आयु ज्ञात करने के लिए किया जाता है। इससे मानव सभ्यता के इतिहास और पृथ्वी पर जीवन के विकास को समझने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। कार्बन डेटिंग का सिद्धांत वायुमंडल में कार्बन का एक रेडियोधर्मी समस्थानिक कार्बन-14 (C-14) पाया जाता है। यह कॉस्मिक किरणों के प्रभाव से नाइट्रोजन-14 से बनता है। पौधे प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बन-14 को ग्रहण करते हैं और पशु-पक्षी पौधों के माध्यम से इसे अपने शरीर में शामिल करते हैं। इस प्रकार जीवित अवस्था में सभी जीवों में कार्बन-14 और कार्…