सौंगी मुखावटे नृत्य कहाँ का है?

हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।

सौंगी मुखौटे नृत्य महाराष्ट्र का एक अनोखा लोक नृत्य है जो मुखौटों और नाटकीय तत्वों से भरपूर है। यह आदिवासी समुदायों द्वारा चैत्र पूर्णिमा पर देवी पूजा के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। नृत्य असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है और नरसिंह अवतार की कथा को जीवंत करता है।

सौंगी मुखौटे नृत्य

उत्पत्ति और परंपरा

यह नृत्य महाराष्ट्र के नासिक और नागपुर जैसे क्षेत्रों में प्रचलित है जहां होली के बाद चैत्र मास की पूर्णिमा पर व्रत, पूजा और बलि के बाद शुरू होता है। दो मुख्य नर्तक शेर के मुखौटे पहनकर नरसिंह का रूप धारण करते हैं जबकि अन्य काल भैरव और वेताल के मुखौटों में भाग लेते हैं। यह धार्मिक अनुष्ठान से जुड़ी लोक कला है।

प्रस्तुति शैली

नर्तक हाथों में छोटी लाठियां थामे पिरामिड आकृति बनाते हुए नाटकीय गतियां करते हैं। ढोल, पावरी और संबल जैसे वाद्ययंत्र लय प्रदान करते हैं। प्रदर्शन ऊर्जावान और मनोरंजक होता है जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

वेशभूषा और संगीत

पावरी वादक हरे चोंगे और मोर पंखों से सजे सिरोस पहनते हैं। मुखौटे नृत्य को रहस्यमय बनाते हैं जबकि संगीत लोक कथाओं को जीवंत करता है। यह शैली महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है।

Post a Comment