हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
यकृत और शराब का संबंध
जब कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता है तो उसका अधिकांश भाग यकृत में ही टूटता और निष्क्रिय होता है। यकृत शराब में मौजूद अल्कोहल को विषैले पदार्थों में परिवर्तित करता है और फिर उन्हें शरीर से बाहर निकालता है। यदि शराब सीमित मात्रा में ली जाए तो यकृत स्वयं को संभाल लेता है लेकिन अत्यधिक और नियमित शराब सेवन से यकृत पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
यकृत पर होने वाले प्रमुख दुष्प्रभाव
अत्यधिक शराब के सेवन से सबसे पहले फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या उत्पन्न होती है जिसमें यकृत की कोशिकाओं में चर्बी जमा होने लगती है। यदि शराब सेवन जारी रहे तो यह स्थिति अल्कोहलिक हेपेटाइटिस में बदल सकती है जिसमें यकृत में सूजन और दर्द होता है। लंबे समय तक शराब पीने से यकृत की कोशिकाएँ नष्ट होने लगती हैं और अंततः सिरोसिस (Cirrhosis) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी उत्पन्न हो सकती है जिसमें यकृत स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है।
अन्य शारीरिक प्रभाव
यकृत की कार्यक्षमता घटने से शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है और थकान, पीलिया, सूजन तथा रक्तस्राव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यकृत विफलता (Liver Failure) भी हो सकती है जिसमें जीवन बचाने के लिए यकृत प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है।
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