रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिंब कैसा होता है?

रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिंब कैसा होता है?
रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु से छोटा होता है। मानव आँख प्रकृति की सबसे जटिल और सूक्ष्म जैविक ऑप्टिकल प्रणालियों में से एक है। हम जो कुछ भी देखते हैं उसका अंतिम भौतिक आधार आँख के भीतर रेटिना (Retina) पर बनने वाले प्रतिबिंब में निहित होता है। भौतिकी के दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत रोचक तथ्य है कि रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिंब वास्तविक (Real), उल्टा (Inverted) तथा वस्तु से छोटा (Diminished) होता है। इसके बावजूद हमें बाहरी संसार सीधा, स्थिर और सही अनुपात में दिखाई देता है। मानव आँख की संरचना: परिचय मानव आँख को प्रायः एक प्राकृतिक कैमरा कहा जाता है। जैसे कैमरे में लेंस, अपर्चर और स्क्रीन होती है वैसे ही आँख में क्रमशः कॉर्निया–लेंस तंत्र, पुतली/आइरिस, और रेटिना होती है। मुख्य भाग कॉर्निया (Cornea): पारदर्शी अग्रभाग जहाँ अधिकतम अपवर्तन होता है। जलीय द्रव (Aqueous Humour): कॉर्निया और लेंस के बीच का द्रव। आइरिस (Iris) व पुतली (Pupil): प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करते हैं। नेत्र लेंस (Eye Lens): उत्तल (Convex) लेंस; फोकसिंग करता है। काचाभ द्रव (Vitreous Humour): लेंस और रेटिना …