वैदिक काल में पणि नाम से जाने गए समुदाय का मुख्य व्यवसाय क्या था?

वैदिक काल में पणि नाम से जाने गए समुदाय का मुख्य व्यवसाय क्या था?
वैदिक काल में पणि नाम से जाने गए समुदाय का मुख्य व्यवसाय व्यापार था। वैदिक काल भारतीय इतिहास का वह प्राचीन चरण है जिसने न केवल भारतीय सभ्यता की नींव रखी बल्कि सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संरचना को भी सुव्यवस्थित रूप प्रदान किया। इस काल की जानकारी का प्रमुख स्रोत वैदिक साहित्य है जिसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के साथ-साथ ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद शामिल हैं। इन ग्रंथों में तत्कालीन समाज के विभिन्न वर्गों, समुदायों और उनकी आजीविका का उल्लेख मिलता है। इन्हीं समुदायों में एक महत्वपूर्ण समुदाय था पणि। वैदिक ग्रंथों में पणियों का उल्लेख मुख्यतः व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े समुदाय के रूप में मिलता है। वैदिक काल: परिचय वैदिक काल को सामान्यतः दो भागों में बाँटा जाता है: ऋग्वैदिक (प्रारंभिक वैदिक) काल उत्तर वैदिक काल ऋग्वैदिक काल में समाज मुख्यतः पशुपालन पर आधारित था जबकि उत्तर वैदिक काल में कृषि, शिल्प और व्यापार का क्रमिक विकास हुआ। इसी काल में विभिन्न पेशागत समुदायों का स्पष्ट स्वरूप उभरकर सामने आया जिनमें पणि समुदाय का विशेष स्थान था। ‘पणि’ शब्द का अर्थ और उत्पत्ति ‘पणि’ श…