मेनिनजाइटिस (तानिका शोथ) नामक रोग में शरीर का कौन सा अंग प्रभावित हो जाता है?

मेनिनजाइटिस (तानिका शोथ) नामक रोग में शरीर का मस्तिष्क अंग प्रभावित हो जाता है। मानव शरीर का मस्तिष्क (Brain) और मेरुरज्जु (Spinal Cord) मिलकर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) का निर्माण करते हैं। यह तंत्र शरीर की समस्त क्रियाओं जैसे सोचने, समझने, स्मरण, गति, संवेदना और जीवन-रक्षक स्वचालित क्रियाओं का नियंत्रण करता है। मस्तिष्क और मेरुरज्जु को बाहरी आघात, संक्रमण तथा रासायनिक क्षति से बचाने के लिए तीन सुरक्षात्मक झिल्लियाँ होती हैं जिन्हेतानिकाएँ (Meninges) कहा जाता है। इन तानिकाओं में सूजन उत्पन्न होने पर जो रोग विकसित होता है उसे मेनिनजाइटिस (Meningitis) या तानिका शोथ कहा जाता है।

मेनिनजाइटिस (तानिका शोथ) नामक रोग में शरीर का मस्तिष्क अंग प्रभावित हो जाता है।

यह रोग तीव्र भी हो सकता है और धीमी गति से बढ़ने वाला भी। कुछ स्थितियों में यह जानलेवा सिद्ध होता है जबकि समय पर निदान और उपचार मिलने पर रोगी पूर्णतः स्वस्थ भी हो सकता है।

तानिकाएँ (Meninges): संरचना और कार्य

मस्तिष्क और मेरुरज्जु के चारों ओर तीन परतें होती हैं:
  • ड्यूरा मेटर (Dura Mater): सबसे बाहरी, मोटी और मजबूत परत। यह यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करती है।
  • अरैक्नॉइड मेटर (Arachnoid Mater): मध्य परत, जालीनुमा संरचना वाली। इसके नीचे सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (CSF) प्रवाहित होता है।
  • पिया मेटर (Pia Mater): सबसे अंदर की पतली परत जो सीधे मस्तिष्क की सतह से जुड़ी होती है और रक्त वाहिकाओं से समृद्ध होती है।
इन तानिकाओं में सूजन आने पर तंत्रिका ऊतकों पर दबाव बढ़ता है, रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और मस्तिष्क की सामान्य क्रियाएँ बाधित हो जाती हैं। यही मेनिनजाइटिस का मूल रोगजनन (Pathogenesis) है।

मेनिनजाइटिस क्या है?

मेनिनजाइटिस तानिकाओं की सूजन की अवस्था है जो प्रायः संक्रमण के कारण होती है। यह संक्रमण बैक्टीरिया, वायरस, फंगस (कवक) या परजीवी से उत्पन्न हो सकता है। कभी-कभी गैर-संक्रामक कारण जैसे दवाओं की प्रतिक्रिया, ऑटोइम्यून विकार, कैंसर या रासायनिक पदार्थ भी तानिका शोथ पैदा कर सकते हैं।

मेनिनजाइटिस के प्रकार

बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस
  • यह सबसे गंभीर और जानलेवा प्रकार है। यह तीव्र गति से बढ़ता है और तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
  • लक्षण: प्रायः अचानक शुरू होते हैं और तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, तीव्र सिरदर्द, उल्टी, भ्रम और चेतना में कमी देखी जाती है।
  • जोखिम: बच्चों, बुजुर्गों, कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में रहने वालों में अधिक।
वायरल मेनिनजाइटिस
  • यह अपेक्षाकृत हल्का होता है और अधिकांश मामलों में स्वयं ठीक हो जाता है।
  • लक्षण बैक्टीरियल की तुलना में कम तीव्र होते हैं।
  • कारण: सामान्य सर्दी-जुकाम के वायरस, आंत्र वायरस आदि।
  • ट्यूबरकुलर (टीबी) मेनिनजाइटिस
  • यह धीरे-धीरे विकसित होता है और लंबे समय तक चल सकता है। भारत जैसे देशों में इसका विशेष महत्व है।
  • लक्षण: लंबे समय तक हल्का बुखार, वजन घटना, सिरदर्द, धीरे-धीरे बढ़ती मानसिक सुस्ती।
फंगल मेनिनजाइटिस
  • यह प्रायः कमजोर प्रतिरक्षा वाले रोगियों (जैसे एचआईवी/एड्स) में पाया जाता है।
  • प्रगति धीमी होती है पर उपचार कठिन हो सकता है।
गैर-संक्रामक मेनिनजाइटिस
  • दवाओं की प्रतिक्रिया, कैंसर, ऑटोइम्यून रोगों या सिर पर चोट के बाद भी तानिका शोथ हो सकता है।

मेनिनजाइटिस के कारण

  • संक्रमण: बैक्टीरिया, वायरस, कवक, परजीवी
  • सिर की चोट या सर्जरी
  • कान, साइनस या फेफड़ों का संक्रमण
  • प्रतिरक्षा तंत्र की कमजोरी
  • टीकाकरण का अभाव
  • भीड़भाड़, खराब स्वच्छता और कुपोषण

रोगजनन (Pathophysiology)

संक्रमण कारक रक्त के माध्यम से या निकटवर्ती संक्रमण से तानिकाओं तक पहुँचते हैं। वहाँ वे सूजन पैदा करते हैं जिससे:
  • सेरेब्रोस्पाइनल द्रव का दबाव बढ़ता है
  • मस्तिष्क ऊतकों में सूजन (Cerebral Edema)
  • रक्त प्रवाह में अवरोध
  • तंत्रिका कोशिकाओं को क्षति
इन परिवर्तनों के कारण न्यूरोलॉजिकल लक्षण उत्पन्न होते हैं।

लक्षण

सामान्य लक्षण
  • तेज बुखार
  • तीव्र सिरदर्द
  • गर्दन में अकड़न
  • मतली और उल्टी
  • प्रकाश से असहनीयता
गंभीर लक्षण
  • भ्रम, चक्कर
  • दौरे (Seizures)
  • चेतना में कमी या बेहोशी
  • बच्चों में चिड़चिड़ापन, दूध न पीना
  • शिशुओं में फॉन्टानेल का उभरना

निदान (Diagnosis)

क्लिनिकल परीक्षण
  • डॉक्टर गर्दन की कठोरता, चेतना स्तर और तंत्रिका संकेतों की जाँच करते हैं।
लम्बर पंक्चर
  • रीढ़ से सेरेब्रोस्पाइनल द्रव निकालकर उसकी जाँच की जाती है। यह मेनिनजाइटिस का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण है।
रक्त जाँच
  • संक्रमण और सूजन के संकेतों की पहचान।
इमेजिंग
  • सीटी स्कैन या एमआरआई से मस्तिष्क की सूजन या जटिलताओं का आकलन।

उपचार (Treatment)

बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस
  • त्वरित एंटीबायोटिक
  • स्टेरॉयड (सूजन कम करने हेतु)
  • आईसीयू निगरानी
वायरल मेनिनजाइटिस
  • सहायक उपचार
  • तरल पदार्थ, दर्द निवारक
  • विश्राम
टीबी मेनिनजाइटिस
  • लंबे समय तक एंटी-टीबी दवाएँ
  • स्टेरॉयड

समर्थनात्मक देखभाल

  • ऑक्सीजन
  • दौरे नियंत्रण
  • द्रव और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन

जटिलताएँ

यदि उपचार में देरी हो जाए तो:
  • स्थायी मस्तिष्क क्षति
  • श्रवण शक्ति में कमी
  • सीखने और स्मृति संबंधी समस्याएँ
  • दौरे मृत्यु तक हो सकती है

रोकथाम (Prevention)

  • टीकाकरण: बच्चों और जोखिम समूहों के लिए अत्यंत आवश्यक
  • स्वच्छता: हाथ धोना, साफ पानी
  • भीड़ से बचाव
  • समय पर संक्रमण का उपचार

सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व

मेनिनजाइटिस केवल व्यक्तिगत बीमारी नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती भी है। समय पर टीकाकरण, जागरूकता और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की सुदृढ़ता से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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