हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
ध्रुवण क्या है?
सामान्यतः किसी प्रकाश स्रोत से निकलने वाली प्रकाश तरंगों में विद्युत क्षेत्र के कंपन प्रसार दिशा के लम्बवत सभी संभावित दिशाओं में होते हैं। ऐसी प्रकाश तरंगें अध्रुवित प्रकाश कहलाती हैं। जब इन कंपन-दिशाओं को किसी विशेष विधि से केवल एक ही तल या एक ही दिशा तक सीमित कर दिया जाता है तो प्राप्त प्रकाश ध्रुवित प्रकाश कहलाता है। इस प्रक्रिया को ही ध्रुवण कहते हैं।
ध्रुवण और तरंगों की प्रकृति
भौतिकी में तरंगें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं:
- अनुदैर्ध्य तरंगें: जिनमें कणों के कंपन तरंग के प्रसार की दिशा में होते हैं (जैसे ध्वनि तरंगें)।
- अनुप्रस्थ तरंगें: जिनमें कणों के कंपन तरंग के प्रसार की दिशा के लम्बवत होते हैं (जैसे जल की सतह पर तरंगें)।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में ही संभव होता है। अनुदैर्ध्य तरंगों में कंपन की दिशा पहले से ही प्रसार दिशा के साथ निश्चित होती है इसलिए उनमें ध्रुवण नहीं हो सकता।
ध्रुवण द्वारा प्रकाश के अनुप्रस्थ होने का प्रमाण
जब प्रकाश तरंगों का ध्रुवण किया जाता है तो यह देखा जाता है कि
- प्रकाश के कंपन किसी एक निश्चित तल में सीमित हो जाते हैं।
- ये कंपन प्रकाश के प्रसार की दिशा के लम्बवत होते हैं।
यदि प्रकाश तरंगें अनुदैर्ध्य होतीं तो उनके कंपन प्रसार दिशा के समानांतर होते और ध्रुवण की कोई अवधारणा संभव नहीं होती। किंतु प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि प्रकाश का ध्रुवण संभव है, अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं।
दैनिक जीवन में ध्रुवण के उदाहरण
ध्रुवण का उपयोग केवल सैद्धांतिक प्रमाण तक सीमित नहीं है बल्कि इसके कई व्यावहारिक उपयोग भी हैं:
- धूप के चश्मों में चमक (Glare) कम करने के लिए
- कैमरों के पोलराइजिंग फ़िल्टर में
- LCD और LED डिस्प्ले में
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