अमीर खुसरो को किस गायन शैली का जन्मदाता माना जाता है?

अमीर खुसरो को किस गायन शैली का जन्मदाता माना जाता है?
अमीर खुसरो को कव्वाली शैली का जन्मदाता माना जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक परंपरा में संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति, सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक समन्वय का माध्यम रहा है। इसी परंपरा में अमीर खुसरो का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। अमीर खुसरो को सामान्यतः कव्वाली शैली का जन्मदाता माना जाता है। यह मान्यता केवल एक ऐतिहासिक कथन नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही सूफ़ी परंपरा, मौखिक इतिहास, संगीत-शास्त्रीय योगदान और सांस्कृतिक प्रभावों का निष्कर्ष है।  अमीर खुसरो: व्यक्तित्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अमीर खुसरो (1253–1325 ई.) मध्यकालीन भारत के ऐसे बहुआयामी व्यक्तित्व थे जिनमें कवि, संगीतकार, इतिहासकार, भाषाविद् और सूफ़ी शिष्य सभी गुण एक साथ विद्यमान थे। वे दिल्ली सल्तनत के कई सुल्तानों के दरबार से जुड़े रहे परंतु उनकी वास्तविक पहचान सूफ़ी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के प्रिय शिष्य के रूप में बनी। खुसरो ने फ़ारसी और हिंदवी (पुरानी हिंदी) दोनों भाषाओं में काव्य रचा। उनकी रचनाओं में भारतीय लोक-भावनाएँ, फ़ारसी काव्य-परंपरा और सूफ़ी दर्शन का अद्भुत संगम दिखाई देता…