टेट्रा एथाइल लेड (TEL) पेट्रोल में क्यों मिलाया जाता है?

टेट्रा एथाइल लेड (TEL) पेट्रोल में ऑक्टेनांक रेटिंग (अपस्फोट की दर) को बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है। आधुनिक युग में परिवहन व्यवस्था का आधार आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine) है। पेट्रोल इंजन जो वाहनों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं उनकी दक्षता, शक्ति और दीर्घायु सीधे ईंधन की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। पेट्रोल की गुणवत्ता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मापदंड ऑक्टेनांक (Octane Number) है जो ईयंधन की अपस्फोट-रोधी क्षमता (Anti-knock property) को दर्शाता है।

टेट्रा एथाइल लेड (TEL) पेट्रोल में ऑक्टेनांक रेटिंग (अपस्फोट की दर) को बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है।

इतिहास में एक समय ऐसा था जब कम ऑक्टेनांक वाला पेट्रोल इंजन में नॉकिंग (Knocking) या अपस्फोट की गंभीर समस्या उत्पन्न करता था। इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने पेट्रोल में कुछ विशेष यौगिक मिलाने का प्रयोग किया जिन्हें एंटी-नॉक एजेंट कहा गया। इन्हीं में से सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक उपयोग में रहा यौगिक था टेट्रा एथाइल लेड (Tetraethyl Lead – TEL)।

ऑक्टेनांक (Octane Number) का अर्थ

ऑक्टेनांक पेट्रोल की वह संख्यात्मक माप है जो यह दर्शाती है कि वह ईंधन इंजन में स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) का कितना विरोध कर सकता है।
  • उच्च ऑक्टेनांक = कम नॉकिंग
  • निम्न ऑक्टेनांक = अधिक नॉकिंग
मानक रूप से:
  • आइसो-ऑक्टेन (Iso-octane) का ऑक्टेनांक = 100
  • n-हेप्टेन (n-heptane) का ऑक्टेनांक = 0
किसी पेट्रोल का ऑक्टेनांक इन दोनों के मिश्रण के तुल्य होता है।

इंजन नॉकिंग (Knocking) क्या है?

इंजन नॉकिंग वह स्थिति है जब पेट्रोल-वायु मिश्रण का दहन अनियंत्रित और असमय हो जाता है। सामान्य स्थिति में स्पार्क प्लग द्वारा उत्पन्न चिंगारी से दहन नियंत्रित ढंग से होता है परंतु:
  • कम ऑक्टेनांक
  • अधिक दाब
  • अधिक तापमान की स्थिति में ईंधन स्वयं ही जल उठता है। 
जिससे:
  • धात्विक खटखटाहट की आवाज
  • शक्ति में कमी
  • इंजन के पुर्ज़ों को क्षति होती है। 
यही समस्या टेट्रा एथाइल लेड के प्रयोग का मुख्य कारण बनी।

टेट्रा एथाइल लेड (TEL) का परिचय

टेट्रा एथाइल लेड एक कार्बनिक सीसा यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र होता है:
  • Pb(C₂H₅)₄
यह एक रंगहीन, वाष्पशील और विषैला द्रव है। 1920 के दशक में इसे पेट्रोल में मिलाकर प्रयोग करना शुरू किया गया।

TEL की खोज और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इंजन समस्या और समाधान की खोज

20वीं शताब्दी के प्रारंभ में ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से विकसित हो रहा था लेकिन इंजन नॉकिंग एक बड़ी समस्या थी। वैज्ञानिकों ने कई यौगिकों पर प्रयोग किया जिनमें:
  • एथेनॉल
  • आयोडीन यौगिक
  • एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन शामिल थे लेकिन सबसे प्रभावी सिद्ध हुआ टेट्रा एथाइल लेड।
व्यावसायिक उपयोग
  • 1921 में इसे पहली बार पेट्रोल में मिलाया गया और शीघ्र ही यह पूरी दुनिया में लीडेड पेट्रोल (Leaded Petrol) के रूप में लोकप्रिय हो गया।

TEL कैसे ऑक्टेनांक बढ़ाता है?

रासायनिक कार्यविधि

दहन के दौरान पेट्रोल में मुक्त रेडिकल (Free radicals) उत्पन्न होते हैं जो अनियंत्रित दहन को जन्म देते हैं। टेट्रा एथाइल लेड:
  • इन मुक्त रेडिकलों को निष्क्रिय करता है
  • दहन की गति को नियंत्रित करता है
  • स्वतः प्रज्वलन को रोकता है
इस प्रकार यह अपस्फोट की दर को कम करके ऑक्टेनांक को बढ़ा देता है।

अत्यल्प मात्रा में अत्यधिक प्रभाव:
  • TEL की विशेषता यह थी कि बहुत कम मात्रा में ऑक्टेनांक में उल्लेखनीय वृद्धि हो जाती थी जिससे यह आर्थिक रूप से भी आकर्षक बना।

लीड स्कैवेंजर का प्रयोग

TEL के दहन से सीसा (Lead) उत्पन्न होता था जो इंजन में जम सकता था। इस समस्या से बचने के लिए:
  • एथिलीन डाइब्रोमाइड
  • एथिलीन डाइक्लोराइड जैसे यौगिक मिलाए जाते थे जो सीसे को वाष्पशील यौगिक बनाकर बाहर निकाल देते थे।

TEL के लाभ

  • उच्च ऑक्टेनांक प्राप्त करना
  • इंजन नॉकिंग में भारी कमी
  • इंजन की शक्ति में वृद्धि
  • ईंधन दक्षता में सुधार
  • कम लागत में प्रभावी समाधान
इन्हीं कारणों से TEL दशकों तक पेट्रोल उद्योग का अभिन्न अंग बना रहा।

स्वास्थ्य पर TEL के दुष्प्रभाव

हालाँकि TEL तकनीकी दृष्टि से लाभकारी था परंतु इसके गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव धीरे-धीरे सामने आने लगे।

सीसा विषाक्तता (Lead Poisoning):
सीसा एक न्यूरोटॉक्सिन है जो:
  • मस्तिष्क
  • तंत्रिका तंत्र
  • रक्त
  • गुर्दे को प्रभावित करता है।
प्रमुख स्वास्थ्य प्रभाव
  • बच्चों में मानसिक विकास में बाधा
  • याददाश्त कमजोर होना
  • चिड़चिड़ापन
  • रक्ताल्पता
  • गर्भवती महिलाओं में भ्रूण पर प्रतिकूल प्रभाव
पर्यावरणीय प्रभाव

वायु प्रदूषण:

लीडेड पेट्रोल के दहन से सीसे के सूक्ष्म कण वायु में फैल जाते थे जो मिट्टी, जल, खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाते थे।

दीर्घकालिक प्रभाव:

सीसा जैव-अविघटनीय (Non-biodegradable) होता है जिससे:
  • पर्यावरण में लंबे समय तक बना रहता है
  • जैव-संचयन (Bioaccumulation) करता है

TEL पर प्रतिबंध (Ban on TEL)

वैश्विक जागरूकता:
1970 के दशक में वैज्ञानिक शोधों ने स्पष्ट कर दिया कि:
  • TEL का लाभ सीमित
  • हानि व्यापक और स्थायी है।
वैकल्पिक समाधान
  • अनलेडेड पेट्रोल (Unleaded Petrol)
  • उच्च ऑक्टेन हाइड्रोकार्बन
  • ऑक्सीजन युक्त यौगिक (MTBE, Ethanol) का विकास किया गया।
वैश्विक प्रतिबंध
  • अमेरिका, यूरोप, भारत सहित अधिकांश देशों में लीडेड पेट्रोल पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया।

भारत में TEL का इतिहास

भारत में भी 1990 के दशक तक TEL युक्त पेट्रोल प्रयोग में था। बढ़ते प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए 2000 के बाद चरणबद्ध तरीके से लीडेड पेट्रोल पूरी तरह बंद कर दिया गया।

आधुनिक युग में ऑक्टेनांक वृद्धि के तरीके

आज TEL के स्थान पर:
  • एथेनॉल ब्लेंडिंग
  • रिफाइनिंग तकनीकों में सुधार
  • उच्च गुणवत्ता वाले हाइड्रोकार्बन का उपयोग किया जाता है जो पर्यावरण के अनुकूल और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं।

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