हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
त्यौहार का परिचय
डंडारी-गुसाडी राज गोंड और कोलम जनजातियों का वार्षिक उत्सव है जो फसल कटाई के बाद समृद्धि और आभार व्यक्त करता है। पुरुष नर्तक मोर पंखों, हिरण सींग, कृत्रिम मूंछें-दाढ़ी और बकरी की खाल से सजी पगड़ी पहनकर गुसाडी नृत्य करते हैं जिसमें डंडे बजाते हुए सामूहिक लयबद्ध गतियां होती हैं।
प्रदर्शन विशेषताएं
नृत्य समूहों में 40 सदस्यों के साथ गांव-गांव घूमते हुए प्रस्तुत होता है जहां ढोल, मंडल और टूटि की थाप पर ऊर्जावान कूदने-चक्कर लगाए जाते हैं। महिलाएं घरों पर पूजा-अर्चना करती हैं जबकि पुरुष दंडारी (डंडे) लेकर उत्सव का शुभारंभ करते हैं। यह पांच दिनों तक चलता है।
सांस्कृतिक महत्व
यह त्यौहार आदिवासी एकता, प्रकृति पूजा और सामुदायिक भाईचारे का प्रतीक है जो तेलंगाना की लोक संस्कृति को समृद्ध करता है। पद्म श्री कनक राजू जैसे कलाकारों ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
