भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में कौन कौन से दो मौलिक पहलू होते है?

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भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में लास्य और तांडव दो मौलिक पहलू होते है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और दार्शनिक आधारों पर टिकी हुई है। इसका मूल स्रोत भरतमुनि का नाट्यशास्त्र माना जाता है जिसमें नृत्य, नाट्य और संगीत के सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसी ग्रंथ में नृत्य के दो प्रमुख और मौलिक पहलुओं लास्य और तांडव का उल्लेख किया गया है। ये दोनों तत्व न केवल नृत्य की शैली को परिभाषित करते हैं बल्कि भाव, रस और अभिव्यक्ति के संतुलन को भी स्थापित करते हैं।

भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में लास्य और तांडव दो मौलिक पहलू होते है।

लास्य: कोमलता और सौंदर्य की अभिव्यक्ति

लास्य नृत्य का वह पक्ष है जो कोमलता, माधुर्य, सौंदर्य और सौम्यता को दर्शाता है। इसका संबंध प्रायः देवी पार्वती से जोड़ा जाता है। लास्य में शरीर की गतियाँ मृदु होती हैं, भंगिमाएँ सुकोमल होती हैं और चेहरे के भाव प्रेम, करुणा, वात्सल्य तथा श्रृंगार रस को प्रकट करते हैं।

लास्य प्रधान नृत्यों में नर्तक/नर्तकी की दृष्टि, भौंहों की गति, हाथों की मुद्राएँ और पदचालन अत्यंत सुसंयत और लयबद्ध होते हैं। भरतनाट्यम, मोहिनीअट्टम, ओडिसी और कथक जैसी शैलियों में लास्य तत्व विशेष रूप से देखने को मिलता है। यह पक्ष नृत्य को सौंदर्यपूर्ण और भावनात्मक गहराई प्रदान करता है।

तांडव: ऊर्जा और वीरता का प्रतीक

तांडव नृत्य का वह पक्ष है जो शक्ति, ऊर्जा, वीरता और प्रचंडता का प्रतिनिधित्व करता है। इसका संबंध भगवान शिव से माना जाता है जिन्हें नटराज कहा गया है। तांडव में तेज, सशक्त और गतिशील अंग-संचालन होता है। इसमें ऊर्जावान पदप्रहार, ऊँची छलांगें, दृढ़ मुद्राएँ और तीव्र लय प्रमुख होती हैं।

तांडव नृत्य रौद्र, वीर और अद्भुत रस की अभिव्यक्ति करता है। कथकली, छऊ, कुचिपुड़ी और मणिपुरी के कुछ रूपों में तांडव तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह नृत्य दर्शकों में उत्साह, शक्ति और ओज का संचार करता है।

लास्य और तांडव का संतुलन

भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें लास्य और तांडव दोनों का संतुलित समन्वय पाया जाता है। कोई भी शास्त्रीय नृत्य केवल कोमल या केवल उग्र नहीं होता बल्कि भाव और शक्ति का सामंजस्य ही उसे पूर्णता प्रदान करता है। यही संतुलन नृत्य को आध्यात्मिक ऊँचाई और सौंदर्यात्मक पूर्णता देता है।

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