हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
मृदु और महिलाओं के लिए उपयुक्त प्रस्तुति को लास्य कहा जाता है। लास्य नृत्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा का एक कोमल और भावपूर्ण रूप है जो मुख्य रूप से महिलाओं के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह श्रृंगार, वात्सल्य जैसे कोमल रसों का उद्दीपन करता है और सुंदरता तथा लावण्य से भरपूर होता है।
उत्पत्ति और परिभाषा
नाट्यशास्त्र के अनुसार, लास्य देवी पार्वती द्वारा प्रदर्शित नृत्य है जो भगवान शिव के तांडव के विपरीत सृजनात्मक और आनंदपूर्ण है। कोमल अंगों की गतियों, भाव और ताल के संयोजन से यह स्त्रीलिंग ऊर्जा का प्रतीक है। साहित्यदर्पण में इसके दस अंग वर्णित हैं जैसे गेयपद, आसीन और पुष्पगंडिका।
विशेषताएं
लास्य में सुडौल मुद्राएं, नाजुक हस्ताक्षर और अभिनय प्रधानता होती है जो इसे तांडव के उग्र रूप से अलग करती है। यह विकट, लघु और छुरित जैसे प्रकारों में विभाजित है जहां महिलाएं घुंघरू, मृदंग आदि पर कोमल प्रदर्शन करती हैं। वेशभूषा श्रृंगारिक और मनमोहक होती है।
सांस्कृतिक महत्व
मणिपुरी के जागोई या कथक के कोमल भागों में लास्य तत्व दिखता है। यह नृत्य भावनाओं की अभिव्यक्ति सिखाता है और भारतीय नृत्य की दोहरी प्रकृति को पूर्ण करता है।
