दूध का खट्टा होना किसके द्वारा होता है?

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दूध का खट्टा होना जीवाणु द्वारा द्वारा होता है। दूध हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण और पोषक खाद्य पदार्थ है। परंतु यदि दूध को अधिक समय तक खुला या बिना उबाल के रखा जाए तो वह खट्टा हो जाता है। यह परिवर्तन किसी रासायनिक पदार्थ के कारण नहीं बल्कि जीवाणुओं (Bacteria) की क्रिया के कारण होता है। इसलिए यह कहा जाता है कि दूध का खट्टा होना जीवाणु द्वारा होता है।

दूध का खट्टा होना जीवाणु द्वारा द्वारा होता है।

दूध खट्टा होने की प्रक्रिया

दूध में स्वाभाविक रूप से लैक्टोज (Lactose) नामक शर्करा पाई जाती है। जब दूध को गर्म वातावरण में या लंबे समय तक रखा जाता है तो उसमें उपस्थित या बाहर से आए जीवाणु सक्रिय हो जाते हैं। ये जीवाणु लैक्टोज को तोड़कर लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) में परिवर्तित कर देते हैं। लैक्टिक अम्ल के बनने से दूध का:
  • स्वाद खट्टा हो जाता है
  • गंध बदल जाती है
  • दूध फटने लगता है

दूध खट्टा करने वाले जीवाणु

दूध को खट्टा करने में मुख्य रूप से लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) जैसे जीवाणु भूमिका निभाते हैं। यही जीवाणु दूध से दही बनाने की प्रक्रिया में भी सहायक होते हैं।

तापमान और समय का प्रभाव

  • गर्म तापमान में जीवाणुओं की वृद्धि तेज होती है इसलिए दूध जल्दी खट्टा होता है।
  • ठंडे तापमान (फ्रिज) में जीवाणुओं की सक्रियता कम हो जाती है जिससे दूध देर से खट्टा होता है।

स्वास्थ्य और दैनिक जीवन में महत्व

दूध का खट्टा होना यह दर्शाता है कि उसमें जीवाणु क्रिया हो चुकी है। हालांकि खट्टा दूध सीधे पीने योग्य नहीं होता लेकिन इससे दही, छाछ जैसे उपयोगी पदार्थ बनाए जा सकते हैं। यह प्रक्रिया खाद्य सूक्ष्मजीव विज्ञान का एक अच्छा उदाहरण है।

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