चालीस वर्ष पूरे हो जाने पर चर्चित ‘अप्सरा’ क्या है?

हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।

चालीस वर्ष पूरे हो जाने पर चर्चित ‘अप्सरा’ न्यूक्लियर रिएक्टर है। भारत के परमाणु विज्ञान और अनुसंधान के इतिहास में अप्सरा न्यूक्लियर रिएक्टर का विशेष स्थान है। यह न केवल भारत का पहला परमाणु रिएक्टर था बल्कि एशिया का भी पहला अनुसंधान परमाणु रिएक्टर माना जाता है। अपने संचालन के चालीस वर्ष पूरे करना भारतीय वैज्ञानिक क्षमता, आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

‘अप्सरा’ न्यूक्लियर रिएक्टर

अप्सरा रिएक्टर का परिचय

अप्सरा न्यूक्लियर रिएक्टर का निर्माण भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), ट्रॉम्बे, मुंबई में किया गया था। यह रिएक्टर मुख्य रूप से अनुसंधान और प्रशिक्षण के उद्देश्य से विकसित किया गया था। इसका उपयोग परमाणु भौतिकी, रेडियोआइसोटोप उत्पादन, चिकित्सा, कृषि तथा औद्योगिक अनुसंधानों में किया गया।

वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व

अप्सरा रिएक्टर ने भारत में परमाणु विज्ञान की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। इसके माध्यम से भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को परमाणु रिएक्टर के संचालन, सुरक्षा और अनुसंधान का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इसी रिएक्टर से जुड़े अनुभवों के आधार पर भारत ने आगे चलकर अधिक उन्नत और शक्तिशाली परमाणु रिएक्टरों का विकास किया।

चिकित्सा और अनुसंधान में योगदान

अप्सरा रिएक्टर से उत्पन्न रेडियोआइसोटोप का उपयोग कैंसर निदान और उपचार, औद्योगिक परीक्षण तथा कृषि अनुसंधान में किया गया। इससे देश में चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा मिली और आम जनता को भी इसके अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुए।

चालीस वर्षों की उपलब्धि

चालीस वर्ष तक सफलतापूर्वक कार्य करना किसी भी परमाणु रिएक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। यह अप्सरा रिएक्टर की सुरक्षा, विश्वसनीयता और वैज्ञानिक दक्षता को दर्शाता है। इस अवधि में इसने हजारों वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया और भारत को परमाणु शक्ति के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया।

Post a Comment