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मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य के पुरुष प्रारूप को चोलोम कहा जाता है जो तांडव शैली का प्रतिनिधित्व करता है। यह मणिपुर राज्य की वैष्णव भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है और रासलीला के पुरुष भाग में प्रमुख है।
चोलोम का परिचय
चोलोम मणिपुरी नृत्य का पुरुष रूप है जिसमें नर्तक पुंग (मणिपुरी ढोल) बजाते हुए ऊर्जावान तांडव गतियां प्रस्तुत करते हैं। यह जागोई (महिला लास्य रूप) के विपरीत शक्तिशाली और लयबद्ध होता है जो कृष्ण लीला के पुरुष चरित्रों को जीवंत करता है।
प्रदर्शन विशेषताएं
पुरुष नर्तक पीतांबरी धोती, मोर मुकुट और चूरा (मोर पंखों का आभूषण) धारण करते हैं तथा पुंग, कारताल और बांसुरी की संगति में चिन (पद संचालन) और भंगी मुद्राएं करते हैं। प्रदर्शन रासलीला, संकीर्तन या लाई हरोबा उत्सवों में होता है जहां घुटने मुड़े और बाहें प्रवाहमय रहती हैं।
सांस्कृतिक महत्व
चोलोम मणिपुरी नृत्य की द्वैतता को दर्शाता है जो भागवत पुराण और गीत गोविंद से प्रेरित है। यह मणिपुर की लोक-शास्त्रीय परंपरा को मजबूत करता है और जवाहरलाल नेहरू मणिपुरी नृत्य अकादमी जैसे संस्थानों में संरक्षित है।
