हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
ठुमरी संगीत उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक हल्की-फुल्की शैली है जो कथक नृत्य से गहराई से जुड़ी हुई है। यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ घराने से संबंधित है जहां नवाब वाजिद अली शाह के दरबार में इसका विकास हुआ।
ठुमरी का ऐतिहासिक विकास
ठुमरी का उद्भव 19वीं शताब्दी में अवध क्षेत्र में हुआ जहां इसे कथक नृत्य के साथ प्रस्तुत किया जाता था। पंडित बिन्दादीन महाराज जैसे रचनाकारों ने राधा-कृष्ण की भक्ति और श्रृंगार रस पर आधारित ठुमरियां रचीं जो कथक के अभिनय भाग को समृद्ध करती हैं। लखनऊ और बनारस घराने की ठुमरियां क्रमशः नृत्यप्रधान और भावप्रधान हैं।
कथक नृत्य से संबंध
कथक में ठुमरी का प्रयोग अभिनय (नृत्य) के लिए किया जाता है जहां नर्तक गीत के बोलों पर हाथों की मुद्राओं, चेहरे की अभिव्यक्तियों और चक्करों से कहानी बयान करते हैं। तबला, सारंगी और हारमोनियम की संगति के साथ यह नृत्य को जीवंत बनाती है जो उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
