हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
भरतनाट्यम नृत्य पारंपरिक रूप से कर्नाटक संगीत के साथ किया जाता है जो दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक प्रमुख शैली है। यह कथन सही है क्योंकि भरतनाट्यम का संगीत मुख्यतः कर्नाटक प्रणाली पर आधारित होता है।
कर्नाटक संगीत का संबंध
भरतनाट्यम तमिलनाडु की शास्त्रीय नृत्य शैली है लेकिन इसका संगीत कर्नाटक संगीत से गहराई से जुड़ा हुआ है जिसमें वर्णम, जावली और तिल्लाना जैसे रूप प्रमुख हैं। कर्नाटक संगीत दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल में प्रचलित है जो नृत्य की अभिव्यक्ति को समृद्ध बनाता है।
प्रदर्शन की विशेषताएं
नृत्य में मृदंगम, वीणा, बांसुरी और घाटम जैसे वाद्ययंत्रों की संगत होती है जो कर्नाटक संगीत की जटिल ताल और रागों को दर्शाते हैं। तंजावुर चौकड़ी ने इस नृत्य को आधुनिक रूप दिया जिसमें कर्नाटक संगीत अभिन्न अंग है। यह संयोजन भावनाओं और भक्ति को व्यक्त करने में सहायक होता है।
