मैमाता एक लोकप्रिय लोक नृत्य कहाँ का है?

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मैमाता त्रिपुरा का एक लोकप्रिय लोक नृत्य है जो राज्य की आदिवासी संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह नृत्य मुख्य रूप से कलोई या त्रिपुरी समुदाय द्वारा किया जाता है और फसल उत्सवों से जुड़ा हुआ है।

मैमाता त्रिपुरा का एक लोकप्रिय लोक नृत्य

मैमाता नृत्य का परिचय

मैमाता, जिसे ममिता या मामता के नाम से भी जाना जाता है, त्रिपुरा के कलोई समुदाय का प्रमुख पारंपरिक नृत्य है। यह नृत्य अक्टूबर-नवंबर में फसल कटाई के बाद मनाए जाने वाले मामता महोत्सव का अभिन्न हिस्सा है जहां मालुमा देवी और लक्ष्मी देवी की पूजा की जाती है।  महिलाएं मुख्य रूप से इसमें भाग लेती हैं लेकिन पुरुष भी संगीत प्रदान करते हैं।

प्रदर्शन की विशेषताएं

नृत्य के दौरान महिलाएं पारंपरिक लाल-सफेद स्कर्ट, ऊपरी वस्त्र और चांदी के आभूषण पहनती हैं तथा सिर पर मिट्टी की मूर्ति या बांस की वस्तुएं रखकर नाचती हैं। पुरुष ढोल, बांसुरी, चिमटा और सारंगी बजाते हुए गीत गाते हैं जो प्रेम, विवाह, परिवार और फसल से जुड़ी कहानियां बयान करते हैं। नर्तक बांस से बने सूप, टोकरियां या देवताओं की प्रतिकृतियां लिए घूमते हैं जो प्रकृति पूजा को दर्शाता है।

सांस्कृतिक महत्व

यह नृत्य त्रिपुरा की आदिवासी एकता, समर्पण और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करता है तथा गांव-गांव जाकर घरों में गाकर इनाम मांगने की परंपरा से जुड़ा है। विवाह और सामाजिक अवसरों पर भी प्रस्तुत होता है जो समुदाय की सामूहिक खुशी का प्रतीक है।  त्रिपुरा जैसे विविधतापूर्ण राज्य में मैमाता अन्य नृत्यों जैसे गरिया, होजागिरी के साथ राज्य की लोककला को समृद्ध करता है।

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