भरतनाट्यम पर ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंध कब लगा दिया था?

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भरतनाट्यम पर ब्रिटिश सरकार ने 1910 में प्रतिबंध लगा दिया था जो दक्षिण भारत की इस शास्त्रीय नृत्य शैली को मंदिरों से जोड़कर अनैतिक मानने का परिणाम था। यह प्रतिबंध देवदासियों से जुड़े नृत्यों को लक्षित करता था जिन्हें विक्टोरियन नैतिकता के विरुद्ध देखा गया।

भरतनाट्यम पर ब्रिटिश सरकार ने 1910 में प्रतिबंध लगा दिया था

प्रतिबंध का कारण

ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने भरतनाट्यम को देवदासियों के प्रदर्शन से जोड़कर इसे वेश्यावृत्ति का रूप माना जो मंदिर अनुष्ठानों का हिस्सा था। मद्रास प्रेसिडेंसी ने 1910 में इसे बैन कर दिया क्योंकि वे भारतीय परंपराओं को दबाना चाहते थे। इससे नृत्य मंदिरों से बाहर हो गया और नर्तकियों की आजीविका प्रभावित हुई।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भरतनाट्यम की जड़ें नाट्यशास्त्र में हैं जो चोल काल से तमिलनाडु के मंदिरों में फला-फूला। देवदासियां इसे भक्ति भाव से प्रस्तुत करती थीं लेकिन ब्रिटिशों ने इसे अनैतिक घोषित कर दिया। 20वीं सदी में राष्ट्रवादियों ने इसका पुनरुद्धार किया।

पुनरुत्थान और विरासत

रुकीणी देवी अरुंडेल जैसे कलाकारों ने 1930-40 के दशक में इसे मंच पर लाकर सम्मानित रूप दिया। आज यह वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित नृत्य है जो मुद्राओं, भाव और ताल पर आधारित है। प्रतिबंध ने वास्तव में इसे अधिक समावेशी बनाया।

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