हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
लेबांग बूमनी नृत्य त्रिपुरा का एक प्रसिद्ध फसल कटाई का लोक नृत्य है जो त्रिपुरी जनजाति द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। यह झूम खेती की फसलें बचाने और समृद्धि की कामना से जुड़ा अनुष्ठानिक प्रदर्शन है। नर्तक रंग-बिरंगे वस्त्रों में बांस की तालियों की थाप पर कीड़ों (लेबांग) को पकड़ने की नकल करते हैं।
उत्पत्ति और महत्व
यह नृत्य त्रिपुरा के मूल निवासी त्रिपुरी समुदाय की परंपरा है जो गरिया उत्सव के बाद मानसून में किया जाता है। लेबांग कीड़े फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए युवा नर्तक इन्हें पकड़कर सौभाग्य और अच्छी उपज की प्रार्थना करते हैं। यह नृत्य समुदाय की कृषि संस्कृति, एकता और प्रकृति पूजा को दर्शाता है।
प्रस्तुति शैली
पुरुष और महिला नर्तक समूह में बांस की क्लैपर्स (ताली) बजाते हुए लयबद्ध गतियां करते हैं जो कीड़ों को आकर्षित करने का प्रतीक है। ढोल, बांसुरी (बाजhi), हेंग्रांग और धुदुक जैसे वाद्ययंत्र संगीत प्रदान करते हैं। नृत्य ऊर्जावान और सामूहिक होता है, जो फसल उत्सव का जश्न मनाता है।
वेशभूषा और संगीत
नर्तक रंगीन पारंपरिक परिधान धारण करते हैं जिसमें महिलाएं चमकीले आभूषण और पुरुष साधारण वस्त्र पहनते हैं। बांस के यंत्रों की थाप पर गीत गाए जाते हैं जो नृत्य को जीवंत बनाते हैं। यह शैली त्रिपुरा की आदिवासी जीवनशैली को प्रतिबिंबित करती है।
