सत्त्रिया (असम) को संगीत नाटक अकादमी द्वारा शास्त्रीय नृत्य के रूप में मान्यता कब दी गयी थी?

सत्त्रिया (असम) को संगीत नाटक अकादमी द्वारा शास्त्रीय नृत्य के रूप में मान्यता कब दी गयी थी?
हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”!  🎉  जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है। सत्त्रिया (असम) को संगीत नाटक अकादमी द्वारा शास्त्रीय नृत्य के रूप में मान्यता 2000 में दी गयी थी। सत्त्रिया नृत्य असम की समृद्ध वैष्णव भक्ति परंपरा से निकला वह प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूप है जिसे संगीत नाटक अकादमी द्वारा वर्ष 2000 में आधिकारिक रूप से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की मान्यता प्रदान की गई। यह मान्यता न केवल असम की सांस्कृतिक धरोहर के लिए गौरव का विषय बनी बल्कि पूरे देश के कला-जगत में सत्त्रिया की विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाला मील का पत्थर सिद्ध हुई। सत्त्रिया की मान्यता: वर्ष 2000 सत्त्रिया नृत्य मूलतः असम के वैष्णव मठों जिन्हें ‘सत्त्र’ कहा जाता है, में धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के रूप में प्रस्तुत किया जाता था। 15 नवंबर 2000 को संगीत नाटक अकादमी ने सत्त्रिया को आधिकारिक रूप से भारत के शास्त्रीय नृत्यों की सूची में शामिल किया जिससे देश के शास्त्रीय नृत्य रूपों की संख्या बढ़कर आठ हो गई…