हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
मुण्डा जनजाति और मुण्डारी नृत्य
मुण्डा जनजाति झारखंड की प्रमुख जनजातियों में से एक है जिसकी सामाजिक संरचना, परंपराएँ और लोककलाएँ विशिष्ट पहचान रखती हैं। मुण्डारी नृत्य इसी जनजाति की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है जिसे फसल कटाई, पर्व-त्योहार, विवाह और सामूहिक उत्सवों के अवसर पर प्रस्तुत किया जाता है।
नृत्य की विशेषताएँ
मुण्डारी नृत्य सामान्यतः समूह में किया जाता है जिसमें पुरुष और महिलाएँ दोनों भाग लेते हैं। नृत्य की गतियाँ सरल, तालबद्ध और सामूहिक होती हैं। मांदर, ढोल, नगाड़ा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की संगति में नृत्य किया जाता है जो वातावरण को उत्साह और ऊर्जा से भर देता है। नर्तक पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं जो उनकी जनजातीय पहचान को और सुदृढ़ करती है।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
मुण्डारी नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि यह मुण्डा जनजाति के सामाजिक जीवन, आपसी एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है। इसके माध्यम से लोककथाएँ, परंपरागत मूल्य और सामुदायिक भावना पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है।
