गोवा के किस नृत्य को योद्धा नृत्य के नाम से भी जाना जाता है?

हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।

गोवा के घोड़े मोदनी नृत्य को योद्धा नृत्य के नाम से भी जाना जाता है। यह नृत्य गोवा की योद्धा परंपरा, मराठा वीरों की शौर्यगाथा और उत्सवधर्मी स्वभाव का जीवंत प्रतीक है।

गोवा के घोड़े मोदनी नृत्य को योद्धा नृत्य के नाम से भी जाना जाता है।

उत्पत्ति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि  

घोड़े मोदनी का विकास उत्तर गोवा के ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ जहाँ इसे मराठा शासक राणे और स्थानीय योद्धाओं की विजयों की स्मृति में किया जाता है। कई विवरणों के अनुसार यह नृत्य पुर्तगालियों पर मराठा वीरों की विजय और उनके विजयी वापसी जुलूस का नाटकीय चित्रण है।लोकधारणा में यह नृत्य गोवा के योद्धा वंश, उनकी लड़ाकू परंपरा और स्वाभिमान को स्मरण कराने वाला अनुष्ठान माना जाता है।

‘योद्धा नृत्य’ नाम का कारण  

नर्तक रौबदार योद्धा-सा वेश धारण करते हैं, कमर से बांधे गए लकड़ी के सजे हुए घोड़े के ढांचे पर सवार होकर युद्धभूमि का दृश्य रचते हैं जिससे इसे योद्धा नृत्य कहा जाता है। हाथों में तलवारें, सिर पर पगड़ी/साफा और चेहरे पर वीर भाव, यह नृत्य सीधे-सीधे घुड़सवार सैनिकों की मारक मुद्रा और रणकौशल को दर्शाता है। नृत्य की हर चाल, घोड़े की टापों की नक़ल, तेज कदमों की थाप और गोल-गोल घूमते हुए बनाए गए घेरे किसी युद्ध अभ्यास या युद्ध दृश्य की अनुभूति कराते हैं।

प्रस्तुति की शैली और वेशभूषा  

घोड़े मोदनी प्रायः पुरुषों द्वारा, कभी-कभी महिला कलाकारों सहित समूह में प्रस्तुत किया जाता है जहाँ सभी कलाकार समन्वित ढंग से आगे-पीछे, गोलाकार और तिरछी कतारों में चलते-नाचते हैं। कलाकारों की कमर से बंधे लकड़ी या बाँस के घोड़े को रंगीन कपड़ों, फूलों और सजावटी सामान से सुसज्जित किया जाता है ताकि वह सचमुच दौड़ते घोड़े जैसी आभा दे। परंपरागत पगड़ी, अंगरखा/धोती, कमरबंद और कभी-कभी कवच जैसी पोशाकें पहनकर नर्तक स्वयं को पूर्ण योद्धा के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

संगीत, ताल और उत्सवों में भूमिका  

घोड़े मोदनी में ढोल, ताशा, कसार जैसे पारंपरिक वादन यंत्रों की तीव्र और ऊर्जावान ताल नर्तकों के तीखे, तेज और वीरतापूर्ण कदमों को गति देती है। यह नृत्य विशेष रूप से वसंत ऋतु में मनाए जाने वाले शिग्मो/शिग्मोत्सव के दौरान आकर्षण का केंद्र होता है जहाँ गाँव-गाँव से आए दल इस योद्धा नृत्य की प्रस्तुति करते हैं। उत्सव के अवसर पर यह नृत्य देवताओं के समक्ष, जुलूसों में और सार्वजनिक मंचों पर किया जाता है जिससे पूरा वातावरण वीर-रस और उत्साह से भर उठता है।

सांस्कृतिक महत्व और आधुनिक परिप्रेक्ष्य  

घोड़े मोदनी गोवा की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो स्थानीय समाज को अपनी ऐतिहासिक चेतना, परंपराओं और वीरता की कहानियों से जोड़े रखता है। शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसे ‘गोवा का योद्धा नृत्य’ कहकर प्रस्तुत किया जाता है जिससे नई पीढ़ी को अपनी लोकसंस्कृति और सैन्य विरासत का परिचय मिलता है। पर्यटन के विस्तार के साथ यह नृत्य विदेशी तथा देशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण बन गया है जो गोवा की समुद्री सुंदरता के साथ-साथ उसकी लोकपरंपराओं को भी करीब से देखना चाहते हैं।

Post a Comment