मणिपुरी नृत्य किसकी रासलीला थीम पर आधारित है?

हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।

मणिपुरी नृत्य राधा और कृष्ण की रासलीला थीम पर आधारित है। मणिपुरी नृत्य भारत की समृद्ध शास्त्रीय नृत्य परंपरा का वह कोमल और आध्यात्मिक रूप है जिसकी मूल आत्मा राधा और कृष्ण की रासलीला मानी जाती है। यह नृत्य केवल कलात्मक प्रस्तुति नहीं बल्कि भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक एकात्मता की जीवंत साधना है।

मणिपुरी नृत्य राधा और कृष्ण की रासलीला थीम पर आधारित है।

मणिपुरी नृत्य की आधारभूमि 

मणिपुरी नृत्य का उद्भव उत्तर-पूर्व भारत के राज्य मणिपुर में हुआ और इसे भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में गिना जाता है। इस नृत्य की विषय-वस्तु मुख्यतः वैष्णव भक्ति परंपरा से जुड़ी है जिसमें राधा-कृष्ण की प्रेम लीला और भागवत पुराण से लिए गए प्रसंग प्रमुख हैं।

राधा–कृष्ण की रासलीला: मूल प्रेरणा

मणिपुरी रास को रासलीला भी कहा जाता है और इसका केंद्र बिंदु वृंदावन की वही दिव्य रात है जब कृष्ण बांसुरी बजाते हैं और राधा व गोपियां उनके संग रास नृत्य करती हैं। यहाँ राधा-कृष्ण का प्रेम केवल लौकिक नहीं, जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीकात्मक रूप है जिसे नृत्य के माध्यम से अत्यंत कोमलता से व्यक्त किया जाता है।

भक्ति, भाव और आध्यात्मिकता 

मणिपुरी रासलीला में नर्तक-नर्तकियां तेज़, नाटकीय आंदोलनों के बजाय धीमे, गोलाकार और प्रवाही संचलन से अंतर्मुखी भक्ति भाव को प्रकट करते हैं। राधा और गोपियों की विरह वेदना, प्रतीक्षा, मिलन की आनंदानुभूति और कृष्ण के प्रति अनन्य समर्पण चेहरे के भाव, हस्तमुद्राओं और शरीर की नर्म गति से अभिव्यक्त होता है।

वेशभूषा, संगीत और शैली 

मणिपुरी रास में नर्तकियों की गोल, घेरदार ‘पोछ’ (लंबा स्कर्टनुमा परिधान), घूँघट और सादा, सुरुचिपूर्ण अलंकरण रासलीला की पवित्रता और गंभीरता को उभारते हैं। इस नृत्य में प्रयोग होने वाला संगीत मणिपुर के लोक संगीत और हिंदुस्तानी शास्त्रीय रागों के समन्वय से बना है; मृदंग, करताल, मंजीरा और संकीर्तन भजनों के साथ राधा-कृष्ण लीला का गायन किया जाता है।

मणिपुरी रास के प्रकार और परंपरा 

मणिपुरी रास के कई रूप माने जाते हैं जैसे महा रास, बसंत रास, नित्य रास आदि जो अलग-अलग ऋतुओं और पर्वों पर राधा-कृष्ण की लीलाओं को नृत्य रूप में प्रस्तुत करते हैं। परंपरा के अनुसार 18वीं शताब्दी में मणिपुर के राजा भाग्यचंद्र ने दिव्य संकेत पाने के बाद राजप्रोत्साहन से महा रासलीला की शुरुआत की जिससे यह नृत्य मणिपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र बन गया।

Post a Comment