आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग किस बीमारी की रोकथाम के लिए किया जाता है?

आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग गलगण्ड (Goitre) बीमारी की रोकथाम के लिए किया जाता है। मानव स्वास्थ्य का सीधा संबंध पोषण से होता है। शरीर को स्वस्थ, सक्रिय और रोगमुक्त बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इन पोषक तत्वों में कुछ की मात्रा बहुत कम होती है परंतु उनका प्रभाव अत्यंत व्यापक होता है। आयोडीन ऐसा ही एक सूक्ष्म पोषक तत्व है जिसकी कमी से होने वाली सबसे प्रसिद्ध बीमारी गलगण्ड (Goitre) है। भारत सहित विश्व के अनेक देशों में आयोडीन की कमी लंबे समय तक एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या रही है। इसी समस्या के समाधान के रूप में आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग अनिवार्य और व्यापक रूप से अपनाया गया।

आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग गलगण्ड (Goitre) बीमारी की रोकथाम के लिए किया जाता है।

गलगण्ड (Goitre) क्या है?

गलगण्ड एक ऐसी बीमारी है जिसमें थायरॉयड ग्रंथि असामान्य रूप से बढ़ जाती है। यह वृद्धि आमतौर पर गर्दन के आगे वाले हिस्से में सूजन के रूप में दिखाई देती है। थायरॉयड ग्रंथि शरीर की एक महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथि है जो थायरॉयड हार्मोन का स्राव करती है।

गलगण्ड के प्रमुख लक्षण
  • गर्दन में सूजन या उभार
  • निगलने या सांस लेने में कठिनाई
  • आवाज में भारीपन
  • थकान और कमजोरी
  • ठंड या गर्मी के प्रति असहिष्णुता
  • बच्चों में मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा
गलगण्ड स्वयं एक लक्षण है जो प्रायः आयोडीन की कमी या थायरॉयड हार्मोन के असंतुलन का संकेत देता है।

आयोडीन: एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व

आयोडीन एक सूक्ष्म खनिज तत्व (Micronutrient) है जिसकी शरीर को बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है। परंतु इसका महत्व अत्यधिक है।

आयोडीन के प्रमुख कार्य
  • थायरॉयड हार्मोन (थाइरॉक्सिन और ट्राइआयोडोथायरोनिन) के निर्माण में सहायक
  • शरीर की चयापचय क्रिया (Metabolism) को नियंत्रित करना
  • शारीरिक वृद्धि और ऊर्जा संतुलन बनाए रखना
  • मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में सहायता
  • गर्भावस्था में भ्रूण के मस्तिष्क विकास के लिए अनिवार्य
यदि शरीर को पर्याप्त आयोडीन न मिले तो थायरॉयड ग्रंथि हार्मोन का निर्माण नहीं कर पाती और परिणामस्वरूप गलगण्ड जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

आयोडीन की कमी और गलगण्ड के बीच संबंध

जब आहार में आयोडीन की मात्रा कम हो जाती है तो थायरॉयड ग्रंथि को पर्याप्त हार्मोन बनाने में कठिनाई होती है। इस स्थिति में शरीर की पिट्यूटरी ग्रंथि अधिक मात्रा में थायरॉयड-उत्तेजक हार्मोन (TSH) स्रावित करती है ताकि थायरॉयड ग्रंथि अधिक सक्रिय हो सके।

परिणामस्वरूप क्या होता है?
  • थायरॉयड ग्रंथि पर अधिक दबाव पड़ता है
  • ग्रंथि आकार में बढ़ने लगती है
  • गर्दन में सूजन दिखाई देती है
  • यही स्थिति गलगण्ड कहलाती है
इस प्रकार स्पष्ट है कि आयोडीन की कमी गलगण्ड का मुख्य और प्रत्यक्ष कारण है।

आयोडीन की कमी से होने वाले अन्य विकार

गलगण्ड आयोडीन की कमी का सबसे स्पष्ट रूप है। परंतु इसके अलावा भी कई गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं जिन्हें सामूहिक रूप से आयोडीन की कमी से होने वाले विकार (Iodine Deficiency Disorders – IDD) कहा जाता है।

प्रमुख विकार
  • बच्चों में मानसिक मंदता
  • सीखने और स्मरण शक्ति में कमी
  • बौनेपन जैसी शारीरिक समस्याएँ
  • गर्भपात या मृत शिशु जन्म
  • नवजात शिशुओं में जन्मजात विकृतियाँ

आयोडीन युक्त नमक: एक सरल और प्रभावी समाधान

आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए सबसे सरल, सस्ता और प्रभावी उपाय है आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग।

आयोडीन युक्त नमक क्या है?
  • आयोडीन युक्त नमक वह साधारण खाद्य नमक है जिसमें वैज्ञानिक विधि द्वारा नियंत्रित मात्रा में आयोडीन मिलाया जाता है। यह नमक स्वाद, रंग और उपयोग में सामान्य नमक जैसा ही होता है परंतु पोषण की दृष्टि से कहीं अधिक उपयोगी होता है।
नमक को आयोडीन युक्त करने का कारण
  • नमक को आयोडीन का वाहक इसलिए चुना गया क्योंकि:
  • नमक का उपयोग लगभग हर व्यक्ति प्रतिदिन करता है
  • इसकी मात्रा सीमित और नियंत्रित रहती है
  • यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध है
इसके माध्यम से पूरे समाज तक आयोडीन पहुँचाया जा सकता है। इस रणनीति को सार्वभौमिक नमक आयोडीकरण (Universal Salt Iodization) कहा जाता है।

आयोडीन युक्त नमक कैसे गलगण्ड की रोकथाम करता है?

आयोडीन युक्त नमक नियमित रूप से सेवन करने पर शरीर को आवश्यक आयोडीन की पूर्ति करता है। इससे:
  • थायरॉयड हार्मोन का सामान्य निर्माण होता है
  • थायरॉयड ग्रंथि पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता
  • ग्रंथि का असामान्य बढ़ना रुक जाता है
  • गलगण्ड की रोकथाम होती है
इस प्रकार आयोडीन युक्त नमक निवारक चिकित्सा (Preventive Medicine) का उत्कृष्ट उदाहरण है।

भारत में गलगण्ड और आयोडीन की कमी की स्थिति

भारत के कई पहाड़ी और दूरदराज़ क्षेत्रों में मिट्टी और पानी में आयोडीन की मात्रा कम पाई जाती है। परिणामस्वरूप वहाँ उगने वाली फसलों और भोजन में भी आयोडीन कम होता है।

ऐतिहासिक स्थिति
  • हिमालयी क्षेत्र, गंगा के मैदानी भाग और पूर्वोत्तर भारत में गलगण्ड के मामले अधिक पाए गए
  • 20वीं शताब्दी के मध्य तक लाखों लोग इससे प्रभावित थे

भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम

भारत सरकार ने आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए:
  • खाद्य नमक के आयोडीकरण को प्रोत्साहन
  • आयोडीन रहित नमक की बिक्री पर प्रतिबंध
  • जन-जागरूकता अभियान
  • स्कूल और आंगनवाड़ी कार्यक्रमों के माध्यम से जानकारी प्रसार
इन प्रयासों से गलगण्ड और अन्य IDD मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।

आयोडीन युक्त नमक का सही उपयोग

केवल आयोडीन युक्त नमक खरीदना ही पर्याप्त नहीं है उसका सही उपयोग भी आवश्यक है।

उपयोग संबंधी सावधानियाँ:
  • नमक को बंद डिब्बे में रखें
  • नमी और धूप से बचाएँ
  • खाना पकने के अंत में नमक डालें, ताकि आयोडीन नष्ट न हो
  • पैकेट पर आयोडीन की मात्रा अवश्य जाँचें

भ्रांतियाँ और वास्तविकता

कुछ लोग यह मानते हैं कि आयोडीन युक्त नमक हानिकारक है या इससे अन्य बीमारियाँ होती हैं। यह एक भ्रम है।

वास्तविकता
  • आयोडीन की मात्रा वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित स्तर पर होती है
  • यह सभी आयु वर्ग के लिए सुरक्षित है
  • इसका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है

बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष महत्व

गर्भावस्था और बचपन में आयोडीन की आवश्यकता अधिक होती है। इस समय इसकी कमी से:
  • भ्रूण का मस्तिष्क विकास प्रभावित हो सकता है
  • बच्चे की बुद्धि और सीखने की क्षमता कम हो सकती है
इसलिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आयोडीन युक्त नमक अत्यंत आवश्यक है।

वैश्विक स्तर पर आयोडीन युक्त नमक का प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, आयोडीन युक्त नमक के व्यापक उपयोग से:
  • करोड़ों बच्चों को मानसिक मंदता से बचाया गया
  • गलगण्ड के मामलों में भारी कमी आई
  • यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे सफल पहलों में से एक बनी

भविष्य की चुनौतियाँ

हालाँकि काफी प्रगति हुई है फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं:
  • ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
  • खुले नमक का उपयोग
  • गलत भंडारण के कारण आयोडीन का नष्ट होना

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