विद्युत मोटर का क्या कार्य है?

विद्युत मोटर का कार्य विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरण करना है। आधुनिक सभ्यता की कल्पना विद्युत मोटर के बिना करना लगभग असंभव है। हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले पंखे, मिक्सर, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, पानी की मोटर, लिफ्ट, कंप्यूटर के कूलिंग फैन, औद्योगिक मशीनें, इलेक्ट्रिक वाहन लगभग हर जगह विद्युत मोटर का प्रयोग होता है। इन सभी उपकरणों के पीछे एक ही मूल सिद्धांत कार्य करता है। विद्युत मोटर का कार्य विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरण करना है।

विद्युत मोटर वह यंत्र है जो विद्युत धारा की सहायता से घूर्णन गति उत्पन्न करता है और इस गति का उपयोग यांत्रिक कार्य करने में किया जाता है।

विद्युत मोटर का कार्य विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरण करना है।

ऊर्जा और उसका रूपान्तरण

भौतिकी में ऊर्जा को कार्य करने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है। ऊर्जा कई रूपों में पाई जाती है:
  • विद्युत ऊर्जा
  • यांत्रिक ऊर्जा
  • ऊष्मा ऊर्जा
  • रासायनिक ऊर्जा
  • प्रकाश ऊर्जा
ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार ऊर्जा को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही उत्पन्न बल्कि केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। विद्युत मोटर इसी सिद्धांत का व्यावहारिक अनुप्रयोग है जहाँ विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदला जाता है।

विद्युत मोटर की परिभाषा

विद्युत मोटर वह विद्युत-यांत्रिक उपकरण है जो विद्युत धारा प्रवाहित होने पर चुंबकीय प्रभाव के कारण घूमता है और इस घूर्णन से यांत्रिक कार्य करता है।

सरल शब्दों में:
  • विद्युत मोटर = विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा

विद्युत मोटर के विकास का इतिहास

विद्युत मोटर का विकास 19वीं शताब्दी में विद्युत और चुंबकत्व के अध्ययन के साथ हुआ। चुंबकीय क्षेत्र में धारा वहन करने वाले चालक पर बल लगने की खोज ने मोटर के सिद्धांत की नींव रखी। इस क्षेत्र में माइकल फैराडे का योगदान ऐतिहासिक रहा। उन्होंने विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) की खोज की जिसने मोटर और जनरेटर दोनों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

विद्युत मोटर का मूल सिद्धांत

विद्युत मोटर का कार्य चुंबकीय क्षेत्र में धारा वहन करने वाले चालक पर लगने वाले बल पर आधारित है।

सिद्धांत का कथन
  • जब किसी चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो चालक पर एक बल कार्य करता है। इससे वह गति करने लगता है। इस बल की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम (Fleming’s Left Hand Rule) प्रयोग किया जाता है।

फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम

फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम के अनुसार:
  • अंगूठा → चालक पर लगने वाला बल (गति)
  • तर्जनी → चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
  • मध्यमा → विद्युत धारा की दिशा
जब इन तीनों उँगलियों को परस्पर लम्बवत फैलाया जाए तो अंगूठा चालक की गति की दिशा बताता है।

विद्युत मोटर की संरचना (Construction of Electric Motor)

एक साधारण विद्युत मोटर के मुख्य भाग निम्नलिखित होते हैं:

कुंडली (Armature / Coil)
  • यह तांबे के तार की बनी होती है जिसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।
चुंबक (Magnet)
  • यह स्थायी चुंबक या विद्युत चुंबक हो सकता है जो चुंबकीय क्षेत्र प्रदान करता है।
स्प्लिट रिंग कम्यूटेटर
  • यह धारा की दिशा को प्रत्येक आधे चक्र में उलट देता है जिससे कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है।
ब्रश (Carbon Brushes)
  • ये बाहरी परिपथ से कुंडली तक विद्युत धारा पहुँचाते हैं।
धुरी (Axle/Shaft)
  • कुंडली इसी धुरी के चारों ओर घूमती है और यांत्रिक ऊर्जा बाहर तक पहुँचती है।

विद्युत मोटर की कार्यप्रणाली

विद्युत मोटर की कार्यविधि को चरणबद्ध रूप में समझा जा सकता है:
  • जब कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण उसके दोनों भुजाओं पर विपरीत दिशाओं में बल लगता है। इन बलों के कारण कुंडली घूमने लगती है। आधा चक्र पूरा होने पर कम्यूटेटर धारा की दिशा बदल देता है। परिणामस्वरूप कुंडली उसी दिशा में घूमती रहती है। इस निरंतर घूर्णन से यांत्रिक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस प्रकार विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरण होता है।

विद्युत मोटर के प्रकार

विद्युत मोटर को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है:

डी.सी. मोटर (Direct Current Motor)
  • डी.सी. धारा से चलती है
  • संरचना सरल होती है
  • गति पर अच्छा नियंत्रण संभव
ए.सी. मोटर (Alternating Current Motor)
  • ए.सी. धारा से चलती है
  • घरेलू और औद्योगिक उपयोग में अधिक प्रचलित
  • रखरखाव कम
ए.सी. मोटर के उपप्रकार
  • इंडक्शन मोटर
  • सिंक्रोनस मोटर

विद्युत मोटर में ऊर्जा रूपान्तरण

विद्युत मोटर में निम्नलिखित ऊर्जा परिवर्तन होता है:
  • विद्युत ऊर्जा → चुंबकीय ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा
कुछ ऊर्जा ऊष्मा और ध्वनि के रूप में भी नष्ट होती है इसलिए मोटर की दक्षता 100% नहीं होती।

विद्युत मोटर की दक्षता (Efficiency)

मोटर की दक्षता का अर्थ है प्रवेश करने वाली विद्युत ऊर्जा में से कितनी ऊर्जा उपयोगी यांत्रिक कार्य में परिवर्तित होती है। उच्च दक्षता वाली मोटर ऊर्जा की बचत करती है और पर्यावरण के लिए भी लाभकारी होती है।

विद्युत मोटर के दैनिक जीवन में उपयोग

विद्युत मोटर का उपयोग हमारे जीवन के लगभग हर क्षेत्र में होता है:
  • पंखा
  • कूलर और एसी
  • पानी की मोटर
  • मिक्सर-ग्राइंडर
  • वॉशिंग मशीन
  • रेफ्रिजरेटर
  • लिफ्ट और एस्केलेटर
  • इलेक्ट्रिक वाहन

औद्योगिक क्षेत्र में विद्युत मोटर

उद्योगों में विद्युत मोटर उत्पादन की रीढ़ मानी जाती है।
  • मशीन टूल्स
  • कन्वेयर बेल्ट
  • क्रेन
  • कंप्रेसर
  • पंप
बड़े उद्योगों में उच्च क्षमता वाली मोटरें प्रयोग की जाती हैं।

कृषि में विद्युत मोटर
  • कृषि क्षेत्र में भी विद्युत मोटर का महत्व अत्यधिक है:
  • सिंचाई पंप
  • थ्रेशर
  • चारा काटने की मशीनें
इससे कृषि उत्पादन बढ़ा है और श्रम की बचत हुई है।

विद्युत मोटर के लाभ
  • स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग
  • संचालन सरल
  • रखरखाव अपेक्षाकृत कम
  • उच्च दक्षता
  • शोर कम

विद्युत मोटर की सीमाएँ

  • विद्युत आपूर्ति पर निर्भरता
  • प्रारंभिक लागत
  • अत्यधिक ताप पर नुकसान
  • ऊर्जा हानि

विद्युत मोटर और जनरेटर में अंतर

विद्युत मोटर और जनरेटर दोनों ही विद्युत-यांत्रिक उपकरण हैं। परंतु इनका कार्य एक-दूसरे के विपरीत होता है। विद्युत मोटर का मुख्य कार्य विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलना है। इसी कारण इसका उपयोग पंखे, मिक्सर, पंप, वॉशिंग मशीन जैसी मशीनों को चलाने में किया जाता है। मोटर की कार्यविधि जॉन एम्ब्रोज़ फ्लेमिंग के फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम पर आधारित होती है जो चालक पर लगने वाले बल की दिशा बताता है।

इसके विपरीत, जनरेटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। इसका उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। जैसे पावर स्टेशन और डायनेमो में। जनरेटर की दिशा-निर्धारण प्रक्रिया फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम पर आधारित होती है जो उत्पन्न विद्युत धारा की दिशा बताता है।

इस प्रकार जहाँ विद्युत मोटर ऊर्जा का उपभोग कर मशीनें चलाती है वहीं जनरेटर ऊर्जा का उत्पादन कर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करता है।

विद्युत मोटर और पर्यावरण

विद्युत मोटर जीवाश्म ईंधन आधारित इंजनों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों में मोटर के उपयोग से प्रदूषण कम हो रहा है।

भविष्य में विद्युत मोटर का महत्व

  • इलेक्ट्रिक वाहन
  • नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ
  • स्मार्ट उद्योग
  • ऊर्जा संरक्षण
भविष्य की तकनीक में उच्च दक्षता और कम ऊर्जा खपत वाली मोटरों की भूमिका निर्णायक होगी।

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