हाइड्रोजन बम किस सिद्धांत पर आधारित है?

हाइड्रोजन बम किस सिद्धांत पर आधारित है?
हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”!  🎉  जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है। हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) के सिद्धांत पर आधारित है। हाइड्रोजन बम जिसे थर्मोन्यूक्लियर बम भी कहा जाता है, आधुनिक भौतिकी की उन अवधारणाओं में से एक है जो नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) के सिद्धांत पर आधारित हैं। यह सिद्धांत बताता है कि जब हल्के नाभिक अत्यधिक ताप और दाब की परिस्थितियों में आपस में मिलते हैं तो भारी नाभिक का निर्माण होता है और अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है। नाभिकीय संलयन क्या है? नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के परमाणु नाभिक (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक) आपस में जुड़कर एक भारी नाभिक बनाते हैं। इस प्रक्रिया में द्रव्यमान का एक छोटा भाग ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है जो आइंस्टीन के द्रव्यमान–ऊर्जा संबंध (E=mc^2) के अनुसार अत्यंत विशाल मात्रा में ऊर्जा प्रदान करता है। हाइड्रोजन बम का मूल सिद्धांत हाइड्रोजन बम की कार्यप्रणाली का आधार हाइड्रोजन के समस्थान…