आपेक्षिक आर्द्रता (Relative humidity) किससे नापी जाती है?

आपेक्षिक आर्द्रता (Relative humidity) हाइग्रोमीटर (Hygrometer) से नापी जाती है। वायुमंडल में जलवाष्प की उपस्थिति पृथ्वी की जलवायु, मौसम, मानव स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और दैनिक जीवन को गहराई से प्रभावित करती है। हवा में नमी का सही आकलन किए बिना मौसम पूर्वानुमान, फसल प्रबंधन, भवन संरक्षण, वस्त्र उद्योग, खाद्य भंडारण तथा वैज्ञानिक अनुसंधान अधूरे रह जाते हैं। इसी नमी की मात्रा को मापने का सबसे प्रचलित और वैज्ञानिक तरीका आपेक्षिक आर्द्रता (Relative Humidity) का निर्धारण है जिसे हाइग्रोमीटर (Hygrometer) नामक यंत्र से मापा जाता है।

आपेक्षिक आर्द्रता (Relative humidity) हाइग्रोमीटर (Hygrometer) से नापी जाती है।

आर्द्रता की संकल्पना

आर्द्रता से आशय वायु में विद्यमान जलवाष्प की मात्रा से है। वायु स्वयं जलवाष्प को “धारण” नहीं करती बल्कि तापमान और दाब के अनुसार उसमें जलवाष्प की एक अधिकतम सीमा होती है। यही कारण है कि गर्म हवा अधिक और ठंडी हवा कम जलवाष्प रख सकती है। आर्द्रता के अध्ययन में मुख्यतः तीन मात्राएँ उपयोग में आती हैं:
  • निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity)
  • विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity)
  • आपेक्षिक आर्द्रता (Relative Humidity)
इनमें से आपेक्षिक आर्द्रता सबसे अधिक व्यवहारिक, तुलनात्मक और उपयोगी मानी जाती है।

आपेक्षिक आर्द्रता: परिभाषा और गणितीय आधार

आपेक्षिक आर्द्रता किसी निश्चित तापमान पर वायु में विद्यमान वास्तविक जलवाष्प दाब (या मात्रा) और उसी तापमान पर वायु द्वारा धारण की जा सकने वाली अधिकतम जलवाष्प दाब (या मात्रा) के अनुपात को प्रतिशत में व्यक्त करती है।

सूत्र:
  • आपेक्षिक आर्द्रता (RH) = वास्तविक जलवाष्प दाब/संतृप्त जलवाष्प दाब X100
यदि RH = 100% है तो वायु संतृप्त है और आगे शीतलन या नमी बढ़ने पर संघनन (ओस, कोहरा, वर्षा) की संभावना बढ़ जाती है।

तापमान और आपेक्षिक आर्द्रता का संबंध

तापमान आपेक्षिक आर्द्रता को गहराई से प्रभावित करता है। समान जलवाष्प मात्रा होने पर:
  • तापमान बढ़ने से RH घटती है (क्योंकि धारण-क्षमता बढ़ती है)।
  • तापमान घटने से RH बढ़ती है (क्योंकि धारण-क्षमता घटती है)।
यही कारण है कि सुबह-सुबह आर्द्रता अधिक और दोपहर में कम प्रतीत होती है भले ही जलवाष्प की वास्तविक मात्रा लगभग समान रहे।

हाइग्रोमीटर: परिचय

हाइग्रोमीटर वह यंत्र है जो वायुमंडलीय आर्द्रता विशेषकर आपेक्षिक आर्द्रता को मापता है। समय के साथ इसके कई रूप विकसित हुए हैं जो अलग-अलग भौतिक सिद्धांतों पर कार्य करते हैं। हाइग्रोमीटर की सहायता से मौसम विज्ञान, प्रयोगशालाएँ, उद्योग, भवन प्रबंधन और घरेलू वातावरण का नियंत्रण संभव हुआ है।

हाइग्रोमीटर का ऐतिहासिक विकास

आर्द्रता मापन की शुरुआत सरल अवलोकनों से हुई। प्रारंभिक यंत्रों में प्राकृतिक पदार्थों (जैसे मानव बाल) के गुणधर्मों का उपयोग किया गया। बाद में तापमान-आधारित, विद्युत-आधारित और डिजिटल सेंसरों ने मापन को अधिक सटीक, त्वरित और विश्वसनीय बनाया।

हाइग्रोमीटर के प्रमुख प्रकार और कार्य-विधि

हेयर हाइग्रोमीटर (Hair Hygrometer)

  • सिद्धांत: मानव या पशु बाल आर्द्रता बढ़ने पर लंबा और घटने पर छोटा हो जाता है।
  • कार्य-विधि: बालों की लंबाई में परिवर्तन को सूई/डायल के माध्यम से RH में परिवर्तित कर पढ़ा जाता है।
  • लाभ: सरल, कम लागत।
  • सीमाएँ: नियमित कैलिब्रेशन आवश्यक; अत्यधिक तापमान पर त्रुटि।

वेट एंड ड्राई बल्ब हाइग्रोमीटर (Wet and Dry Bulb / Psychrometer)

  • सिद्धांत: वाष्पीकरण शीतलन।
  • संरचना: शुष्क बल्ब थर्मामीटर, आर्द्र (गीला) बल्ब थर्मामीटर (गीले कपड़े से ढका)
  • कार्य-विधि: गीले बल्ब से वाष्पीकरण होता है जिससे उसका तापमान गिरता है। शुष्क और आर्द्र बल्ब के तापांतर से तालिकाओं/सूत्रों द्वारा RH निकाली जाती है।
  • लाभ: विश्वसनीय, मौसम विज्ञान में मानक।
  • सीमाएँ: पवन की आवश्यकता; पढ़ने में समय।

ड्यू-पॉइंट हाइग्रोमीटर (Dew Point Hygrometer)

  • सिद्धांत: वह तापमान जिस पर वायु संतृप्त होकर संघनन शुरू करती है।
  • कार्य-विधि: सतह को ठंडा किया जाता है; ओस बनने के तापमान से ड्यू-पॉइंट ज्ञात कर RH निकाली जाती है।
  • लाभ: उच्च सटीकता।
  • सीमाएँ: महंगा, जटिल।

इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल हाइग्रोमीटर

  • सिद्धांत: विद्युत प्रतिरोध/धारिता में परिवर्तन।
  • कार्य-विधि: नमी-संवेदी पदार्थ RH के साथ विद्युत गुण बदलते हैं; माइक्रोप्रोसेसर RH दिखाता है।
  • लाभ: त्वरित, सटीक, डेटा लॉगिंग।
  • सीमाएँ: सेंसर ड्रिफ्ट; कैलिब्रेशन आवश्यक।

हाइग्रोमीटर का कैलिब्रेशन और सटीकता

सटीक मापन हेतु कैलिब्रेशन अनिवार्य है। सामान्य विधियाँ:
  • संतृप्त लवण विलयन (Known RH)
  • मानक प्रयोगशाला तुलना
  • नियमित अंतराल पर जाँच
त्रुटियों के स्रोतों में तापमान उतार-चढ़ाव, पवन, सेंसर वृद्धावस्था और संदूषण शामिल हैं।

आपेक्षिक आर्द्रता के व्यावहारिक उपयोग

मौसम विज्ञान
  • वर्षा, कोहरा, ओस का पूर्वानुमान
  • हीट इंडेक्स और कंफर्ट इंडेक्स का निर्धारण
कृषि
  • फसल रोगों का प्रबंधन
  • सिंचाई योजना
  • भंडारण (अनाज, बीज)
मानव स्वास्थ्य
  • श्वसन स्वास्थ्य
  • ऊष्माघात/हीट स्ट्रेस का आकलन
  • अस्पतालों में नियंत्रित वातावरण
उद्योग
  • वस्त्र, कागज, फार्मास्यूटिकल्स
  • इलेक्ट्रॉनिक्स (स्टैटिक कंट्रोल)
  • पेंटिंग और कोटिंग प्रक्रियाएँ
भवन और विरासत संरक्षण
  • फफूँद नियंत्रण
  • लकड़ी/कागज संरक्षण
  • संग्रहालय और पुस्तकालय

आपेक्षिक आर्द्रता, ओसांक और मौसमीय घटनाएँ

RH और ओसांक (Dew Point) का संबंध मौसमीय प्रक्रियाओं की कुंजी है। उच्च RH के साथ तापमान गिरने पर संघनन होकर बादल/वर्षा संभव होती है। निम्न RH शुष्कता, त्वचा/आँखों की परेशानी और स्थैतिक विद्युत बढ़ा सकती है।

सीमाएँ और सावधानियाँ

  • RH तापमान-सापेक्ष है; इसलिए तापमान मापन साथ होना चाहिए।
  • तेज हवा/प्रत्यक्ष धूप से बचाव आवश्यक।
अलग-अलग हाइग्रोमीटर की रेंज और सटीकता भिन्न होती है।

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