हीरे की चमक किस कारण होती है?

हीरे की चमक पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण होती है। प्रकृति ने मानव को अनेक अद्भुत पदार्थ प्रदान किए हैं किंतु हीरा (Diamond) उनमें सबसे अधिक आकर्षक, मूल्यवान और रहस्यमय पदार्थों में से एक है। हीरे की चमक, उसकी झिलमिलाहट और प्रकाश को बिखेरने की क्षमता सदियों से मनुष्य को मोहित करती आ रही है। आभूषणों में प्रयुक्त हीरे की सबसे बड़ी विशेषता उसकी अद्वितीय चमक (Brilliance) है। सामान्य धारणा यह है कि हीरे की चमक केवल उसकी कठोरता या दुर्लभता के कारण होती है किंतु वैज्ञानिक दृष्टि से यह चमक पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के कारण उत्पन्न होती है।

हीरे की चमक पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण होती है।

हीरे के बारे में

हीरा कार्बन का एक क्रिस्टलीय अपरूप (Allotrope) है। इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है जिससे एक अत्यंत मजबूत त्रिविमीय जालक (Lattice) बनता है। यही संरचना हीरे को अत्यधिक कठोर बनाती है।

हीरे की प्रमुख विशेषताएँ

  • अत्यधिक कठोरता (Mohs पैमाने पर 10)
  • उच्च अपवर्तनांक
  • उच्च तापीय चालकता
  • पारदर्शिता
  • अद्भुत चमक और आग (Fire)
इनमें से चमक और आग सीधे-सीधे प्रकाश के व्यवहार से संबंधित हैं जिनका मूल कारण पूर्ण आंतरिक परावर्तन है।

प्रकाश का व्यवहार : परावर्तन और अपवर्तन

हीरे की चमक को समझने से पहले हमें प्रकाश के मूलभूत व्यवहार को समझना आवश्यक है।

परावर्तन (Reflection)

जब प्रकाश किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटता है तो इस घटना को परावर्तन कहते हैं। दर्पण इसका सबसे सामान्य उदाहरण है।

परावर्तन के नियम:
  • आपतन कोण = परावर्तन कोण
  • आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं

अपवर्तन (Refraction)

जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है और उसकी गति में परिवर्तन के कारण उसका पथ मुड़ जाता है तो इसे अपवर्तन कहते हैं। उदाहरण के लिए हवा से पानी में जाने पर प्रकाश मुड़ जाता है।

अपवर्तन की मात्रा माध्यम के अपवर्तनांक (Refractive Index) पर निर्भर करती है।

अपवर्तनांक और हीरा:
  • अपवर्तनांक (n) किसी माध्यम में प्रकाश की गति और निर्वात में प्रकाश की गति के अनुपात को दर्शाता है।
  • n = निर्वात में प्रकाश की गति/माध्यम में प्रकाश की गति
हीरे का अपवर्तनांक:
  • हीरे का अपवर्तनांक लगभग 2.42 होता है
  • यह अधिकांश पारदर्शी पदार्थों (जैसे कांच ≈ 1.5, पानी ≈ 1.33) से कहीं अधिक है
उच्च अपवर्तनांक का अर्थ है कि हीरे में प्रकाश की गति बहुत कम हो जाती है और प्रकाश तीव्रता से मुड़ता है। यही गुण पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए आवश्यक आधार तैयार करता है।

पूर्ण आंतरिक परावर्तन : सिद्धांत

पूर्ण आंतरिक परावर्तन क्या है?

जब प्रकाश किसी सघन माध्यम (जैसे हीरा) से विरल माध्यम (जैसे वायु) की ओर जाता है और आपतन कोण एक विशेष कोण से अधिक हो जाता है तब प्रकाश बाहर न निकलकर उसी माध्यम में पूर्ण रूप से परावर्तित हो जाता है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।

आवश्यक शर्तें

  • पूर्ण आंतरिक परावर्तन होने के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं:
  • प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाए
  • आपतन कोण क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो

क्रांतिक कोण और हीरा

क्रांतिक कोण वह आपतन कोण होता है जिस पर अपवर्तन कोण 90° हो जाता है।

हीरे का क्रांतिक कोण

  • हीरे से वायु के लिए क्रांतिक कोण लगभग 24° होता है
  • यह बहुत छोटा कोण है जिसका अर्थ है कि थोड़े से झुकाव पर भी पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो सकता है
कांच का क्रांतिक कोण लगभग 42° होता है इसलिए कांच में हीरे जैसी चमक नहीं दिखाई देती।

हीरे की चमक का वास्तविक कारण

अब हम मुख्य प्रश्न पर आते हैं हीरे की चमक पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण क्यों होती है?

जब प्रकाश की किरणें हीरे के ऊपरी भाग (Crown) से प्रवेश करती हैं:
  • वे हीरे के भीतर कई बार अपवर्तित होती हैं
  • नीचे की सतहों (Pavilion facets) पर वे ऐसे कोणों पर टकराती हैं जो क्रांतिक कोण से अधिक होते हैं
  • परिणामस्वरूप प्रकाश बाहर निकलने के बजाय बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन करता है
  • अंततः वही प्रकाश ऊपरी सतह से वापस बाहर निकलता है
इस प्रक्रिया में प्रकाश की तीव्रता बढ़ जाती है और हीरा अत्यधिक चमकदार दिखाई देता है।

हीरे की कटिंग और पूर्ण आंतरिक परावर्तन

हीरे की चमक केवल उसके पदार्थ के कारण नहीं बल्कि उसकी वैज्ञानिक कटिंग के कारण भी होती है।

आदर्श कट (Ideal Cut)

यदि हीरे की कटिंग सही कोणों पर की जाए:
  • अधिकतम प्रकाश भीतर प्रवेश करता है
  • अधिकांश प्रकाश पूर्ण आंतरिक परावर्तन द्वारा वापस ऊपर निकलता है
यदि कटिंग गलत हो:
  • प्रकाश नीचे या किनारों से बाहर निकल जाता है
  • हीरा फीका दिखाई देता है

कट के प्रमुख भाग

  • Crown (ऊपरी भाग)
  • Pavilion (निचला भाग)
  • Table (शीर्ष सपाट सतह)
इन सभी कोणों को इस प्रकार डिज़ाइन किया जाता है कि पूर्ण आंतरिक परावर्तन अधिकतम हो।

विवर्तन (Dispersion) और हीरे की “आग”

हीरे की चमक के साथ-साथ उसमें रंगीन झिलमिलाहट भी दिखाई देती है जिसे आग (Fire) कहते हैं।

विवर्तन क्या है?

जब श्वेत प्रकाश अपने विभिन्न रंगों में विभाजित हो जाता है तो इस प्रक्रिया को विवर्तन कहते हैं।

हीरे में विवर्तन

  • हीरे का विवर्तनांक विभिन्न रंगों के लिए अलग-अलग होता है
  • इसलिए लाल, नीला, हरा आदि रंग अलग-अलग कोणों पर मुड़ते हैं
  • पूर्ण आंतरिक परावर्तन के साथ मिलकर यह रंगीन चमक उत्पन्न करता है

अन्य रत्नों की तुलना में हीरे की चमक

रत्नों की चमक का सीधा संबंध उनके अपवर्तनांक और क्रांतिक कोण से होता है। अपवर्तनांक जितना अधिक होता है माध्यम में प्रकाश उतना अधिक मुड़ता है और क्रांतिक कोण जितना छोटा होता है उतनी ही आसानी से पूर्ण आंतरिक परावर्तन की स्थिति बनती है। यही कारण है कि विभिन्न रत्नों की चमक में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

हीरा इस दृष्टि से सबसे विशिष्ट रत्न है। इसका अपवर्तनांक लगभग 2.42 होता है जो सामान्य रत्नों की तुलना में काफी अधिक है। साथ ही, हीरे का क्रांतिक कोण केवल लगभग 24° होता है। इस छोटे क्रांतिक कोण के कारण हीरे के भीतर प्रवेश करने वाली अधिकांश प्रकाश किरणें बाहर निकलने के बजाय बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन करती हैं और अंततः ऊपर की सतह से तीव्र चमक के साथ बाहर आती हैं। इसी कारण हीरे की चमक अत्यधिक होती है।

इसके विपरीत कांच का अपवर्तनांक लगभग 1.5 और क्रांतिक कोण लगभग 42° होता है। बड़ा क्रांतिक कोण होने के कारण कांच में पूर्ण आंतरिक परावर्तन कम होता है और प्रकाश का बड़ा भाग बाहर निकल जाता है। इसलिए कांच की चमक अपेक्षाकृत कम होती है।

क्वार्ट्ज का अपवर्तनांक लगभग 1.54 और क्रांतिक कोण लगभग 41° होता है। यह कांच से थोड़ा बेहतर प्रकाशीय गुण रखता है परंतु फिर भी इसमें पूर्ण आंतरिक परावर्तन की मात्रा सीमित रहती है। परिणामस्वरूप इसकी चमक मध्यम स्तर की होती है।

नीलम का अपवर्तनांक लगभग 1.76 और क्रांतिक कोण लगभग 34°*होता है। यह कांच और क्वार्ट्ज की तुलना में अधिक प्रकाश को भीतर परावर्तित कर सकता है। इसलिए इसकी चमक अच्छी मानी जाती है लेकिन फिर भी यह हीरे की चमक तक नहीं पहुँच पाती।

दैनिक जीवन में पूर्ण आंतरिक परावर्तन के उदाहरण

हीरा केवल एक उदाहरण है। पूर्ण आंतरिक परावर्तन के अन्य उपयोग भी हैं:
  • ऑप्टिकल फाइबर में संचार
  • एंडोस्कोपी और चिकित्सा उपकरण
  • प्रिज़्म आधारित दूरबीन
  • रिफ्लेक्टर और प्रकाश सज्जा
इन सभी में वही सिद्धांत कार्य करता है जो हीरे की चमक का कारण है।

हीरे की चमक : सौंदर्य और विज्ञान का संगम

हीरा केवल एक आभूषण नहीं है बल्कि यह भौतिकी के नियमों का सजीव उदाहरण है। पूर्ण आंतरिक परावर्तन, अपवर्तनांक, क्रांतिक कोण और विवर्तन ये सभी सिद्धांत मिलकर हीरे को अद्वितीय बनाते हैं।

Post a Comment