यहीं पर एंजाइम (Enzyme) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। एंजाइम ऐसे जैव उत्प्रेरक (Biological Catalysts) होते हैं जो शरीर में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को हजारों से लेकर लाखों गुना तक बढ़ा देते हैं। वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो चुका है कि एंजाइम मूलतः प्रोटीन होते हैं।
एंजाइम का परिचय
एंजाइम वे विशेष जैव-अणु हैं जो जीवित कोशिकाओं में रासायनिक अभिक्रियाओं को तीव्र करते हैं किंतु स्वयं अभिक्रिया के अंत में अपरिवर्तित रहते हैं।
सरल शब्दों में कहा जाए तो:
- एंजाइम ऐसे प्रोटीन होते हैं जो शरीर की जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं को नियंत्रित और तीव्र करते हैं।
एंजाइम का नामकरण प्रायः उस पदार्थ (Substrate) के आधार पर किया जाता है जिस पर वे कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए:
- एमाइलेज (Amylase) — स्टार्च पर कार्य करता है
- प्रोटीएज (Protease) — प्रोटीन पर कार्य करता है
- लाइपेज (Lipase) — वसा पर कार्य करता है
एंजाइम मूलतः प्रोटीन क्यों कहलाते हैं?
प्रोटीन जीवों के लिए अत्यंत आवश्यक जैव-अणु हैं जिनका निर्माण अमीनो अम्लों (Amino Acids) से होता है। एंजाइमों की संरचना भी अमीनो अम्लों की लंबी श्रृंखलाओं से बनी होती है।
वैज्ञानिक प्रमाण
- एंजाइमों का रासायनिक विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि उनकी संरचना प्रोटीन जैसी ही होती है।
- उच्च तापमान, अम्ल या क्षार के प्रभाव से एंजाइम विकृत (Denature) हो जाते हैं जैसे प्रोटीन हो जाते हैं।
- प्रोटीन विघटनकारी एंजाइम (Proteolytic Enzymes) एंजाइमों को भी नष्ट कर सकते हैं।
इन सभी तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि एंजाइम मूलतः प्रोटीन हैं।
एंजाइम की रासायनिक संरचना
एंजाइम प्रोटीन प्रकृति के होते हैं इसलिए उनकी संरचना भी प्रोटीन जैसी होती है।
अमीनो अम्ल
- एंजाइम 20 प्रकार के अमीनो अम्लों से बने होते हैं।
- अमीनो अम्ल आपस में पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े होते हैं।
संरचनात्मक स्तर
एंजाइम की संरचना चार स्तरों में समझी जाती है:
- प्राथमिक संरचना – अमीनो अम्लों का क्रम
- द्वितीयक संरचना – α-हेलिक्स और β-शीट
- तृतीयक संरचना – त्रि-आयामी आकृति
- चतुर्थक संरचना – एक से अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ
यही त्रि-आयामी संरचना एंजाइम की क्रियाशीलता के लिए अत्यंत आवश्यक होती है।
सक्रिय स्थल (Active Site)
प्रत्येक एंजाइम में एक विशिष्ट भाग होता है जिसे सक्रिय स्थल (Active Site) कहते हैं।
- यही वह स्थान है जहाँ सब्सट्रेट जुड़ता है।
- सक्रिय स्थल की आकृति सब्सट्रेट के अनुरूप होती है।
यदि एंजाइम की संरचना में थोड़ा-सा भी परिवर्तन हो जाए तो सक्रिय स्थल नष्ट हो सकता है और एंजाइम कार्य करना बंद कर देता है।
एंजाइम और सब्सट्रेट की क्रिया विधि
एंजाइम और सब्सट्रेट के बीच होने वाली क्रिया को समझाने के लिए दो प्रमुख मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं:
लॉक-एंड-की मॉडल
इस मॉडल के अनुसार:
- एंजाइम का सक्रिय स्थल ताले की तरह होता है
- सब्सट्रेट चाबी की तरह फिट होता है
इंड्यूस्ड-फिट मॉडल
इस मॉडल के अनुसार:
- एंजाइम का सक्रिय स्थल लचीला होता है
- सब्सट्रेट के जुड़ते ही एंजाइम अपनी आकृति बदल लेता है
दोनों मॉडल इस तथ्य को सिद्ध करते हैं कि एंजाइम की प्रोटीन संरचना उसकी क्रियाशीलता के लिए अनिवार्य है।
एंजाइमों के प्रकार
प्रोटीन प्रकृति के आधार पर एंजाइमों को कई प्रकारों में बाँटा जा सकता है:
सरल एंजाइम
- केवल प्रोटीन से बने होते हैं
- उदाहरण: पेप्सिन, ट्रिप्सिन
संयुग्म एंजाइम
- प्रोटीन + सहकारक (Cofactor)
- सहकारक धातु आयन या कार्बनिक अणु हो सकता है
एंजाइम की विशिष्टता
एंजाइम अत्यंत विशिष्ट होते हैं।
- एक एंजाइम केवल एक विशेष सब्सट्रेट पर ही कार्य करता है
- यह विशिष्टता उसकी प्रोटीन संरचना के कारण होती है
उदाहरण:
- सुक्रेज केवल सुक्रोज को ही तोड़ता है
- लैक्टेज केवल लैक्टोज पर कार्य करता है
तापमान और pH का प्रभाव
क्योंकि एंजाइम प्रोटीन होते हैं इसलिए उन पर तापमान और pH का गहरा प्रभाव पड़ता है।
तापमान
- अधिक तापमान पर एंजाइम विकृत हो जाते हैं
- सामान्यतः 37°C मानव एंजाइमों के लिए उपयुक्त होता है
pH
- प्रत्येक एंजाइम का एक विशिष्ट pH होता है
- अम्लीय या क्षारीय माध्यम में प्रोटीन संरचना नष्ट हो सकती है
एंजाइम विकृतिकरण (Denaturation)
जब एंजाइम की तृतीयक संरचना नष्ट हो जाती है तो उसे विकृतिकरण कहते हैं।
- उच्च तापमान
- तीव्र अम्ल या क्षार
- भारी धातुएँ
ये सभी प्रोटीन एंजाइम को निष्क्रिय कर देते हैं।
एंजाइम और चयापचय
चयापचय (Metabolism) की सभी क्रियाएँ एंजाइमों द्वारा नियंत्रित होती हैं।
- अपचय (Catabolism)
- उपचय (Anabolism)
इन दोनों प्रक्रियाओं में एंजाइमों की भूमिका अनिवार्य है।
एंजाइमों का जैविक महत्व
एंजाइमों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है:
- पाचन संभव नहीं
- ऊर्जा उत्पादन नहीं
- DNA प्रतिकृति नहीं
- कोशिका विभाजन नहीं
इन सभी क्रियाओं का आधार एंजाइम हैं और एंजाइम प्रोटीन हैं।
एंजाइम अपवाद
हालाँकि अधिकांश एंजाइम प्रोटीन होते हैं परंतु कुछ RNA एंजाइम (Ribozyme) भी पाए गए हैं।
- ये अपवाद हैं
- सामान्य नियम यही है कि एंजाइम मूलतः प्रोटीन होते हैं
