विटामिन B₁₂ का परिचय
विटामिन B₁₂ को कोबालामिन भी कहा जाता है क्योंकि इसकी संरचना में कोबाल्ट धातु उपस्थित होती है। यह जल-विलेय (water soluble) विटामिन है और B-कॉम्प्लेक्स समूह का भाग है। विटामिन B₁₂ के प्राकृतिक तथा कृत्रिम कई रूप होते हैं जिनमें प्रमुख हैं:
- साइनोकोबालामिन
- मिथाइलकोबालामिन
- एडेनोसिलकोबालामिन
- हाइड्रॉक्सोकोबालामिन
इनमें साइनोकोबालामिन सबसे अधिक स्थिर होता है। इसी कारण इसे औषधीय तथा पूरक रूप में सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है।
साइनोकोबालामिन का रासायनिक स्वरूप
साइनोकोबालामिन एक जटिल कार्बनिक यौगिक है। इसकी संरचना में:
- कोबाल्ट का एक केंद्रीय परमाणु
- कोरिन रिंग (Corrin ring)
- सायनो समूह (–CN) शामिल होते हैं।
सायनो समूह के कारण ही इसे साइनोकोबालामिन कहा जाता है। मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद यह सायनो समूह अलग हो जाता है और यह सक्रिय रूपों मिथाइलकोबालामिन तथा एडेनोसिलकोबालामिन में परिवर्तित हो जाता है।
विटामिन B₁₂ की खोज और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
विटामिन B₁₂ की खोज का संबंध पर्निशियस एनीमिया (घातक रक्ताल्पता) नामक रोग से जुड़ा है। 19वीं शताब्दी के अंत में यह रोग लाइलाज माना जाता था। बाद में यह पाया गया कि यकृत (लिवर) का सेवन इस रोग में लाभकारी है। आगे के अनुसंधानों से यह स्पष्ट हुआ कि यकृत में उपस्थित एक विशेष पोषक तत्व विटामिन B₁₂ इस रोग का उपचार करता है। 1948 में विटामिन B₁₂ को शुद्ध रूप में पृथक किया गया और बाद में साइनोकोबालामिन का संश्लेषण संभव हुआ।
साइनोकोबालामिन के स्रोत
प्राकृतिक स्रोत
- विटामिन B₁₂ मुख्यतः पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है जैसे:
- दूध और दुग्ध उत्पाद
- अंडा
- मांस
- मछली
- यकृत (लिवर)
वनस्पति खाद्य पदार्थों में विटामिन B₁₂ सामान्यतः अनुपस्थित होता है। इसलिए शाकाहारी व्यक्तियों में इसकी कमी की संभावना अधिक रहती है।
कृत्रिम स्रोत
- साइनोकोबालामिन का औद्योगिक उत्पादन सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया) द्वारा किण्वन (fermentation) प्रक्रिया से किया जाता है। यही कारण है कि यह:
- टैबलेट
- कैप्सूल
- इंजेक्शन
- फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के रूप में उपलब्ध होता है।
विटामिन B₁₂ का अवशोषण (Absorption)
विटामिन B₁₂ का अवशोषण एक जटिल प्रक्रिया है:
- मुख में प्रवेश – भोजन के साथ B₁₂ पेट में पहुँचता है।
- पेट में क्रिया – पेट की अम्लीय अवस्था में यह प्रोटीन से मुक्त होता है।
- इंट्रिंसिक फैक्टर से संयोजन – पेट की कोशिकाएँ एक विशेष प्रोटीन (Intrinsic Factor) बनाती हैं जिससे B₁₂ जुड़ जाता है।
- छोटी आंत में अवशोषण – यह युग्म इलियम भाग में अवशोषित होता है।
- यकृत में संचयन – अवशोषित विटामिन B₁₂ का बड़ा भाग यकृत में संग्रहित हो जाता है।
इंट्रिंसिक फैक्टर की कमी होने पर विटामिन B₁₂ का अवशोषण नहीं हो पाता जिससे पर्निशियस एनीमिया उत्पन्न होता है।
साइनोकोबालामिन के जैविक कार्य
रक्त निर्माण में भूमिका
विटामिन B₁₂ लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में आवश्यक है। इसकी कमी से:
- मेगालोब्लास्टिक एनीमिया
- कमजोरी
- थकान जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
तंत्रिका तंत्र का संरक्षण
यह:
- माइलिन शीथ के निर्माण
- तंत्रिका आवेगों के संचरण में सहायक है।
- कमी होने पर हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नता और स्मृति-दोष हो सकता है।
डीएनए संश्लेषण
- विटामिन B₁₂, फोलिक एसिड के साथ मिलकर डीएनए संश्लेषण में भाग लेता है। कोशिका विभाजन और वृद्धि के लिए यह अनिवार्य है।
ऊर्जा चयापचय
- यह वसा और प्रोटीन चयापचय में सहायक है जिससे शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है।
विटामिन B₁₂ की कमी के कारण
- शाकाहारी भोजन
- वृद्धावस्था
- आंत्र रोग
- पेट की शल्यक्रिया
- इंट्रिंसिक फैक्टर की कमी
कमी के लक्षण
विटामिन B₁₂ की कमी धीरे-धीरे विकसित होती है और इसके लक्षण भी क्रमिक रूप से प्रकट होते हैं:
- अत्यधिक थकान
- पीली त्वचा
- सांस फूलना
- स्मरण शक्ति में कमी
- अवसाद
- हाथ-पैरों में झनझनाहट
- संतुलन में कमी
दीर्घकालीन कमी से स्थायी तंत्रिका क्षति भी हो सकती है।
निदान
विटामिन B₁₂ की कमी का निदान:
- रक्त परीक्षण
- सीरम B₁₂ स्तर
- होमोसिस्टीन स्तर द्वारा किया जाता है।
उपचार और पूरकता
साइनोकोबालामिन का उपयोग
साइनोकोबालामिन का उपयोग:
- टैबलेट
- सिरप
- इंजेक्शन के रूप में किया जाता है।
गंभीर कमी में इंजेक्शन अधिक प्रभावी होते हैं।
आहार सुधार
- दूध, दही, पनीर
- अंडा (यदि स्वीकार्य हो)
फोर्टिफाइड अनाज का सेवन लाभकारी होता है।
साइनोकोबालामिन और सार्वजनिक स्वास्थ्य
विकासशील देशों में विटामिन B₁₂ की कमी एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है विशेषकर:
- गर्भवती महिलाएँ
- वृद्ध
- शाकाहारी समुदाय के बीच।
खाद्य फोर्टिफिकेशन और जन-जागरूकता इस समस्या के समाधान में सहायक हो सकती है।
