मिजोरम के बाँस नृत्य को क्या कहा जाता है?

मिजोरम के बाँस नृत्य को क्या कहा जाता है?
मिजोरम के बाँस नृत्य को चेराव (Cheraw) कहा जाता है। भारत के उत्तर–पूर्वी क्षेत्र में स्थित मिजोरम अपनी विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, संगीत, लोककथाओं और नृत्य परंपराओं के लिए जाना जाता है। इन्हीं परंपराओं में सबसे अधिक लोकप्रिय और विश्वविख्यात नृत्य है चेराव (Cheraw)। इसे सामान्यतः “बाँस नृत्य” कहा जाता है। यह नृत्य न केवल मिज़ो समाज की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है बल्कि सामूहिक अनुशासन, लयात्मक सौंदर्य और पारस्परिक सहयोग का अनुपम उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। चेराव में बाँस की छड़ों के बीच तालबद्ध ढंग से नृत्य करते कलाकार जिस सटीकता, संतुलन और सौंदर्य का प्रदर्शन करते हैं वह दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यह नृत्य सदियों से मिज़ो समुदाय के सामाजिक–धार्मिक जीवन का अभिन्न अंग रहा है और आज भी उत्सवों, विवाह समारोहों, तथा सांस्कृतिक आयोजनों में पूरे उत्साह से किया जाता है। चेराव नृत्य की उत्पत्ति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि चेराव नृत्य की उत्पत्ति को लेकर कई लोककथाएँ प्रचलित हैं। परंपरागत मान्यता के अनुसार इसका आरंभ प्राचीन काल में उस समय हुआ जब मिज़ो समाज प्रकृति के साथ घनिष्ठ संबंध रखता था। बाँस, …