वृद्धों के चिकित्साशास्त्रीय अध्ययन (Medical Study) को क्या कहा जाता है?

वृद्धों के चिकित्साशास्त्रीय अध्ययन (Medical Study) को गैरियाट्रिक्स (Geriatrics) कहा जाता है। मानव जीवन एक सतत यात्रा है जिसमें जन्म, बाल्यावस्था, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और अंततः वृद्धावस्था शामिल है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसके परिणामस्वरूप विश्व-भर में वृद्ध जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। वृद्धावस्था अपने साथ अनेक शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तन लेकर आती है। इन्हीं परिवर्तनों, रोगों और स्वास्थ्य आवश्यकताओं के वैज्ञानिक अध्ययन को वृद्धों का चिकित्साशास्त्रीय अध्ययन कहा जाता है जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में गैरियाट्रिक्स (Geriatrics) कहा जाता है।

वृद्धों के चिकित्साशास्त्रीय अध्ययन (Medical Study) को गैरियाट्रिक्स (Geriatrics) कहा जाता है।

गैरियाट्रिक्स चिकित्सा विज्ञान की वह विशेष शाखा है जो बुजुर्गों में होने वाले रोगों की पहचान, उपचार, रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य-देखभाल पर केंद्रित होती है। यह केवल रोगों के इलाज तक सीमित नहीं है बल्कि वृद्ध व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का भी प्रयास करती है।

गैरियाट्रिक्स का अर्थ और परिभाषा

गैरियाट्रिक्स (Geriatrics) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के दो शब्दों से हुई है:
  • Geron: जिसका अर्थ है “वृद्ध व्यक्ति”
  • Iatreia: जिसका अर्थ है “चिकित्सा” या “उपचार”
इस प्रकार, गैरियाट्रिक्स का शाब्दिक अर्थ है वृद्ध व्यक्तियों की चिकित्सा।
यह चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य समस्याओं के अध्ययन और उपचार से संबंधित है।

वृद्धावस्था: एक जैविक और सामाजिक प्रक्रिया

वृद्धावस्था केवल आयु का बढ़ना नहीं है बल्कि यह एक जटिल जैविक प्रक्रिया है।

जैविक परिवर्तन
  • मांसपेशियों की शक्ति में कमी
  • हड्डियों का कमजोर होना
  • दृष्टि और श्रवण शक्ति का ह्रास
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी
मानसिक परिवर्तन
  • स्मरण शक्ति का कमजोर होना
  • अवसाद और चिंता
  • एकाग्रता में कमी
सामाजिक परिवर्तन
  • सेवानिवृत्ति के बाद भूमिका में बदलाव
  • सामाजिक अलगाव
  • परिवार पर निर्भरता
गैरियाट्रिक्स इन सभी पहलुओं को एक साथ समझने और समाधान प्रदान करने का प्रयास करती है।

गैरियाट्रिक्स का महत्व

बढ़ती वृद्ध जनसंख्या
  • आज विश्व के अधिकांश देशों में वृद्ध जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत में भी औसत आयु में वृद्धि के कारण बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।
बहुरोगता (Multiple Morbidities)

वृद्धावस्था में एक ही व्यक्ति कई रोगों से ग्रसित हो सकता है जैसे:
  • मधुमेह
  • उच्च रक्तचाप
  • हृदय रोग
  • गठिया
गैरियाट्रिक्स इन रोगों के समन्वित उपचार पर बल देती है।

जीवन की गुणवत्ता
  • गैरियाट्रिक्स का मुख्य उद्देश्य केवल जीवन को लंबा करना नहीं बल्कि स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।

वृद्धावस्था में सामान्य रोग और समस्याएँ

हृदय और रक्त संचार संबंधी रोग
  • उच्च रक्तचाप
  • कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज
  • हृदयाघात
अस्थि और जोड़ रोग
  • ऑस्टियोपोरोसिस
  • गठिया
  • फ्रैक्चर का बढ़ा जोखिम
तंत्रिका तंत्र के रोग
  • अल्ज़ाइमर
  • पार्किंसन रोग
  • डिमेंशिया
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ
  • अवसाद
  • अनिद्रा
  • सामाजिक भय
गैरियाट्रिक्स इन सभी रोगों के समग्र प्रबंधन पर केंद्रित है।

गैरियाट्रिक चिकित्सा की विशेषताएँ

रोग-केन्द्रित नहीं, व्यक्ति-केन्द्रित दृष्टिकोण
  • गैरियाट्रिक्स में रोग से अधिक रोगी को महत्व दिया जाता है।
बहुविषयक उपचार
  • इसमें चिकित्सक, नर्स, फिजियोथेरेपिस्ट, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सभी मिलकर काम करते हैं।
दीर्घकालिक देखभाल
  • वृद्ध रोगों का उपचार अक्सर दीर्घकालिक होता है जिसमें निरंतर निगरानी आवश्यक होती है।

गैरियाट्रिक्स में निदान की चुनौतियाँ

  • रोगों के लक्षण अस्पष्ट हो सकते हैं
  • एक दवा का दूसरी दवा पर प्रभाव
  • शरीर की प्रतिक्रिया धीमी होना
इसलिए वृद्धों के लिए निदान और उपचार विशेष सावधानी से किया जाता है।

औषधि उपचार और सावधानियाँ

वृद्धावस्था में दवाओं का चयन अत्यंत सावधानी से किया जाता है क्योंकि:
  • यकृत और गुर्दों की कार्यक्षमता कम हो जाती है
  • दवाओं के दुष्प्रभाव अधिक हो सकते हैं
गैरियाट्रिक्स में न्यूनतम और आवश्यक दवाओं के प्रयोग पर बल दिया जाता है।

गैरियाट्रिक पुनर्वास (Rehabilitation)

पुनर्वास का उद्देश्य वृद्ध व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना है। इसमें शामिल हैं:
  • फिजियोथेरेपी
  • व्यावसायिक चिकित्सा
  • संतुलन और चाल प्रशिक्षण

पोषण और आहार का महत्व

वृद्धावस्था में संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक है:
  • प्रोटीन युक्त भोजन
  • कैल्शियम और विटामिन-D
  • कम वसा और कम नमक
गैरियाट्रिक्स पोषण को उपचार का अनिवार्य भाग मानती है।

मानसिक और भावनात्मक देखभाल

सामाजिक सहभागिता
  • परिवार और समाज से जुड़ाव मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
परामर्श और सहयोग
  • मनोवैज्ञानिक परामर्श वृद्धों को अवसाद से बाहर निकालने में सहायक होता है।

भारत में गैरियाट्रिक्स की स्थिति

भारत में पारंपरिक रूप से बुजुर्गों की देखभाल परिवार द्वारा की जाती रही है परंतु बदलती सामाजिक संरचना के कारण गैरियाट्रिक चिकित्सा की आवश्यकता बढ़ रही है। आज कई अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में गैरियाट्रिक विभाग स्थापित किए जा रहे हैं।

गैरियाट्रिक्स और समाज

गैरियाट्रिक्स केवल चिकित्सा विषय नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। यह वृद्धों को सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रदान करने की दिशा में कार्य करती है।

भविष्य में गैरियाट्रिक्स की भूमिका

  • वृद्ध-अनुकूल स्वास्थ्य सेवाएँ
  • घरेलू देखभाल प्रणाली
  • डिजिटल स्वास्थ्य निगरानी
भविष्य में गैरियाट्रिक्स चिकित्सा विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण शाखाओं में से एक बनकर उभरेगी।

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