हाइपोग्लाइसेमिया सामान्यतः मधुमेह (Diabetes) से जुड़े रोगियों में अधिक देखा जाता है। किंतु यह गैर-मधुमेही व्यक्तियों में भी विभिन्न कारणों से हो सकता है।
ग्लूकोस और शरीर में इसकी भूमिका
ग्लूकोस कार्बोहाइड्रेट के पाचन से बनने वाली एक सरल शर्करा है जो शरीर की प्रत्येक कोशिका के लिए ईंधन का कार्य करती है। विशेष रूप से मस्तिष्क लगभग पूरी तरह ग्लूकोस पर निर्भर होता है।
ग्लूकोस संतुलन का नियमन
रक्त में ग्लूकोस का स्तर मुख्यतः दो हार्मोन नियंत्रित करते हैं:
- इंसुलिन (Insulin): रक्त से ग्लूकोस को कोशिकाओं में प्रवेश कराने में सहायक।
- ग्लूकागॉन (Glucagon): जब रक्त शर्करा कम हो तब यकृत से ग्लूकोस को रक्त में छोड़ता है।
इन दोनों हार्मोनों के संतुलन से ही रक्त शर्करा सामान्य स्तर (आमतौर पर 70–110 mg/dL उपवास में) पर बनी रहती है।
हाइपोग्लाइसेमिया की परिभाषा
जब रक्त में ग्लूकोस का स्तर 70 mg/dL से कम हो जाता है तो इसे हाइपोग्लाइसेमिया कहा जाता है। यह स्थिति हल्की, मध्यम या गंभीर हो सकती है। गंभीर अवस्था में यह बेहोशी, दौरे (Seizures) या कोमा तक का कारण बन सकती है।
हाइपोग्लाइसेमिया के प्रकार
हाइपोग्लाइसेमिया को कारण और समय के आधार पर विभिन्न प्रकारों में बाँटा जा सकता है:
पवास हाइपोग्लाइसेमिया (Fasting Hypoglycemia)
यह तब होता है जब लंबे समय तक भोजन न किया जाए। इसके कारणों में:
- यकृत रोग
- हार्मोनल असंतुलन
- कुछ दवाएँ
- शराब का अत्यधिक सेवन
भोजन के बाद हाइपोग्लाइसेमिया (Reactive Hypoglycemia)
यह भोजन करने के 2–4 घंटे बाद होता है। इसमें शरीर अत्यधिक इंसुलिन स्राव कर देता है जिससे रक्त शर्करा तेजी से गिर जाती है।
मधुमेह-सम्बंधित हाइपोग्लाइसेमिया
मधुमेह रोगियों में इंसुलिन या अन्य शर्करा-नियंत्रक दवाओं की अधिक मात्रा से यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
हाइपोग्लाइसेमिया के कारण
हाइपोग्लाइसेमिया के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- इंसुलिन या दवाओं की अधिक मात्रा
- भोजन छोड़ना या देर से भोजन करना
- अत्यधिक शारीरिक श्रम या व्यायाम
- अत्यधिक शराब सेवन
- यकृत, गुर्दे या हार्मोनल रोग
- कुछ ट्यूमर (जैसे इंसुलिनोमा)
हाइपोग्लाइसेमिया के लक्षण
हाइपोग्लाइसेमिया के लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं और व्यक्ति से व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं। सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
प्रारंभिक लक्षण
- अत्यधिक भूख लगना
- पसीना आना
- हाथ-पैर काँपना
- चक्कर आना
- घबराहट
मध्यम लक्षण
- धुंधला दिखाई देना
- सिरदर्द
- थकान
- एकाग्रता में कमी
गंभीर लक्षण
- बोलने में कठिनाई
- दौरे पड़ना
- बेहोशी
- कोमा
मस्तिष्क पर हाइपोग्लाइसेमिया का प्रभाव
मस्तिष्क ग्लूकोस पर अत्यधिक निर्भर होता है। रक्त में ग्लूकोस की कमी से मस्तिष्क की कोशिकाएँ ऊर्जा से वंचित हो जाती हैं जिससे:
- भ्रम
- स्मृति हानि
- चेतना का ह्रास
- स्थायी न्यूरोलॉजिकल क्षति (गंभीर मामलों में) हो सकती है।
निदान (Diagnosis)
हाइपोग्लाइसेमिया का निदान निम्न तरीकों से किया जाता है:
- रक्त शर्करा जाँच (Blood Glucose Test)
- ग्लूकोमीटर द्वारा त्वरित जाँच
- उपवास या भोजन पश्चात जाँच
- हार्मोनल जाँच (इंसुलिन, कोर्टिसोल आदि)
उपचार (Treatment)
हाइपोग्लाइसेमिया का उपचार उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।
हल्का हाइपोग्लाइसेमिया
- तुरंत 15–20 ग्राम ग्लूकोस या चीनी का सेवन
- मीठा रस, ग्लूकोज टैबलेट, शहद
गंभीर हाइपोग्लाइसेमिया
- ग्लूकागॉन इंजेक्शन
- अस्पताल में ग्लूकोस ड्रिप
- चिकित्सकीय निगरानी
प्राथमिक सहायता
यदि किसी व्यक्ति में हाइपोग्लाइसेमिया के लक्षण दिखें तो:
- तुरंत मीठा पदार्थ दें।
- 15 मिनट बाद पुनः रक्त शर्करा जाँचें।
- बेहोशी की स्थिति में मुँह से कुछ न दें। तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
संभावित जटिलताएँ
उपचार न होने पर हाइपोग्लाइसेमिया से:
- बार-बार बेहोशी
- स्थायी मस्तिष्क क्षति
- दुर्घटनाओं का खतरा
- मृत्यु तक हो सकती है।
रोकथाम (Prevention)
हाइपोग्लाइसेमिया से बचाव के लिए:
- नियमित और संतुलित भोजन
- दवाओं का सही समय और मात्रा
- शराब से परहेज
- नियमित रक्त शर्करा जाँच
- चिकित्सकीय परामर्श
आहार और जीवनशैली प्रबंधन
हाइपोग्लाइसेमिया से ग्रसित व्यक्तियों के लिए:
- जटिल कार्बोहाइड्रेट (Whole grains)
- पर्याप्त प्रोटीन
- बार-बार छोटे भोजन
- अत्यधिक मीठे से बचाव
- नियमित व्यायाम (डॉक्टर की सलाह से)
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