कबीर की मृत्यु के पश्चात उनकी समाधि कहाँ बनाई गई?

कबीर की मृत्यु के पश्चात उनकी समाधि कहाँ बनाई गई?
कबीर की मृत्यु के पश्चात उनकी समाधि मगहर में बनाई गई। भारतीय संत परंपरा में कबीर एक ऐसे निर्गुण संत, कवि और समाज-सुधारक के रूप में प्रतिष्ठित हैं जिन्होंने जाति, पंथ, संप्रदाय और धार्मिक आडंबरों से ऊपर उठकर मानवता, प्रेम और सत्य का संदेश दिया। उनका संपूर्ण जीवन लोकभाषा में व्यक्त गहन दार्शनिक अनुभूतियों, सामाजिक चेतना और आध्यात्मिक विद्रोह का संगम है। कबीर ने न केवल अपने समय की रूढ़ियों को चुनौती दी बल्कि आने वाली सदियों के लिए भी वैचारिक आलोक छोड़ा। कबीर के जीवन से जुड़ा एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और प्रतीकात्मक तथ्य यह है कि उनकी मृत्यु के पश्चात उनकी समाधि मगहर में बनाई गई। यह तथ्य मात्र ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि कबीर के विचार-दर्शन, सामाजिक सुधार और धार्मिक समन्वय का सशक्त प्रतीक है। मगहर वह स्थान था जिसे लोकमान्यता में अशुभ माना जाता था। यह कहा जाता था कि जो मगहर में मरेगा उसे मोक्ष नहीं मिलेगा। ऐसे विश्वासों को तोड़ते हुए कबीर ने मगहर को अपनी अंतिम स्थली चुना और अपने जीवन-दर्शन को कर्म में परिणत किया। कबीर: जीवन, काल और वैचारिक पृष्ठभूमि कबीर का जन्मकाल और जन्मस्थान विद्वानों में विवादा…