पखावज अक्षरों का प्रयोग किस शास्त्रीय नृत्य को समाप्त करने के लिए किया जाता है?

पखावज अक्षरों का प्रयोग किस शास्त्रीय नृत्य को समाप्त करने के लिए किया जाता है?
पखावज अक्षरों का प्रयोग ओडिसी शास्त्रीय नृत्य को समाप्त करने के लिए किया जाता है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा में ओडिसी (Odissi) एक अत्यंत प्राचीन, सौम्य और आध्यात्मिक नृत्य शैली है। इसकी जड़ें ओडिशा की मंदिर परंपरा, जगन्नाथ संस्कृति और महारी–गोटिपुआ परंपराओं में निहित हैं। इस नृत्य की विशेषता इसकी त्रिभंगी, चौक, कोमल लास्य, सुसंयत तांडव और गहन भावाभिव्यक्ति में निहित है। ओडिसी की संपूर्ण प्रस्तुति एक सुविचारित संरचना का पालन करती है। प्रवेश से लेकर उत्कर्ष और अंत तक। इस संरचना के अंतिम चरण में पखावज (या मृदंग/मर्दल) से निकलने वाले अक्षरों (बोलों) का विशिष्ट और निर्णायक प्रयोग किया जाता है जो नृत्य को एक पूर्ण, सशक्त और आध्यात्मिक समापन प्रदान करता है। ओडिसी शास्त्रीय नृत्य : परिचय ओडिसी भारत की आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है। इसकी पहचान मंदिरों की मूर्तिकला में अंकित नृत्य-भंगिमाओं, ओडिशा संगीत की मधुरता और संस्कृत–ओड़िया काव्य पर आधारित अभिव्यक्ति से होती है। ओडिसी नृत्य में नृत्य, नाट्य और संगीत का समन्वय अत्यंत सूक्ष्म रूप में देखने को मिलता है। यह केवल दर्शनीय कला …