वह नृत्य कौन सा है जिसमें चित्रित मुखौटे, बड़ी स्कर्ट, भारी जैकेट, बहुत सारे आभूषण और लंबे हेडड्रेस शामिल हैं?

वह नृत्य कथकली है जिसमें चित्रित मुखौटे, बड़ी स्कर्ट, भारी जैकेट, बहुत सारे आभूषण और लंबे हेडड्रेस शामिल हैं। भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपरा विश्व में अपनी विविधता, प्रतीकात्मकता और सौंदर्यात्मक गहराई के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं नृत्य परंपराओं में कथकली एक ऐसा नृत्य-नाट्य रूप है जो अपने भव्य वेश-भूषा, चित्रित मुखौटे जैसे मेकअप, विशाल स्कर्ट, भारी जैकेट, अलंकृत आभूषण और ऊँचे–लंबे हेडड्रेस के कारण तुरंत पहचाना जाता है। कथकली केवल नृत्य नहीं बल्कि दृश्य, अभिनय, संगीत और रंगों का एक जीवंत नाट्य रूप है। इसमें हर पोशाक, रंग और आभूषण का अपना गहरा अर्थ होता है।

वह नृत्य कथकली है जिसमें चित्रित मुखौटे, बड़ी स्कर्ट, भारी जैकेट, बहुत सारे आभूषण और लंबे हेडड्रेस शामिल हैं।

कथकली की पहचान ही उसकी अत्यंत अलंकृत और प्रतीकात्मक वेश-भूषा है। यही कारण है कि जब कहा जाता है वह नृत्य जिसमें चित्रित मुखौटे, बड़ी स्कर्ट, भारी जैकेट, बहुत सारे आभूषण और लंबे हेडड्रेस शामिल हैं तो स्वाभाविक रूप से कथकली का नाम सामने आता है।

कथकली के बारे में

कथकली केरल राज्य का प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य-नाट्य है। यह लगभग 17वीं शताब्दी में विकसित हुआ और इसका मूल उद्देश्य महाकाव्यों, पुराणों और धार्मिक कथाओं को नाटकीय रूप में प्रस्तुत करना था। कथकली शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है:
  • कथा – कहानी
  • कली – अभिनय या प्रस्तुति
अर्थात् कथकली का अर्थ हुआ कहानी का अभिनय द्वारा प्रस्तुतीकरण।

कथकली नृत्य की प्रमुख विशेषता : वेश-भूषा

कथकली की सबसे विशिष्ट और आकर्षक विशेषता उसकी भव्य वेश-भूषा है। इस नृत्य में कलाकार की पोशाक इतनी भव्य और भारी होती है कि वह सामान्य मानव से अधिक दैवी या पौराणिक पात्र जैसा प्रतीत होता है।

कथकली की वेश-भूषा में निम्न तत्व अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं:
  • चित्रित मुखौटे जैसा मेकअप
  • बड़ी गोल स्कर्ट
  • भारी जैकेट
  • अनेक आभूषण
  • ऊँचा और लंबा हेडड्रेस

चित्रित मुखौटे जैसा मेकअप

यद्यपि कथकली में वास्तविक मुखौटा (Mask) नहीं पहना जाता परंतु कलाकार का मेकअप इतना जटिल, रंगीन और उभरा हुआ होता है कि वह चित्रित मुखौटे जैसा प्रतीत होता है।

मेकअप का उद्देश्य
  • पात्र के स्वभाव को दर्शाना
  • अच्छे–बुरे का स्पष्ट भेद
  • दूर बैठे दर्शकों तक भाव पहुँचाना
प्रमुख रंग
  • हरा (पच्चा) – देवता, नायक, धर्म
  • लाल (काठी) – अहंकार, क्रूरता
  • काला – राक्षसी प्रवृत्ति
  • पीला – तपस्या और पवित्रता
यह चित्रित मेकअप कथकली की पहचान का सबसे प्रमुख अंग है।

बड़ी स्कर्ट (कच्चा)
कथकली नर्तक द्वारा पहनी जाने वाली बड़ी गोल स्कर्ट उसकी भव्यता को कई गुना बढ़ा देती है। यह स्कर्ट:
  • कई परतों में बनी होती है
  • अंदर बाँस या मोटे कपड़े का ढाँचा होता है
  • नर्तक को विशाल और प्रभावशाली रूप देती है
इस स्कर्ट को पहनने के बाद कलाकार का शरीर सामान्य मानव से अधिक दैत्य या देवता जैसा प्रतीत होता है।

भारी जैकेट (अंगवस्त्र)

कथकली की वेश-भूषा में पहनी जाने वाली जैकेट अत्यंत भारी और अलंकृत होती है। इसमें:
  • मोटे कपड़े
  • रंगीन कढ़ाई
  • उभरी हुई सजावट शामिल होती है। 
यह जैकेट कलाकार के ऊपरी शरीर को मजबूत, शक्तिशाली और नाटकीय स्वरूप प्रदान करती है।

आभूषणों की भूमिका

कथकली में आभूषणों का प्रयोग अत्यंत उदारता से किया जाता है। नर्तक:
  • गर्दन में भारी हार
  • कानों में बड़े कुंडल
  • भुजाओं में बाजूबंद
  • कमर में करधनी धारण करता है।
इन आभूषणों का उद्देश्य केवल सजावट नहीं बल्कि पात्र की सामाजिक स्थिति, शक्ति और दैवी स्वरूप को प्रदर्शित करना है।

लंबा और ऊँचा हेडड्रेस (किरिडम)

कथकली का हेडड्रेस उसकी वेश-भूषा का सबसे आकर्षक और विशिष्ट भाग है। इसे किरिडम कहा जाता है।

हेडड्रेस की विशेषताएँ
  • अत्यंत ऊँचा और भारी
  • कागज, लकड़ी और कपड़े से निर्मित
  • रंगीन सजावट और चमकदार तत्व
  • हेडड्रेस कलाकार को राजा, देवता या महापुरुष का स्वरूप प्रदान करता है।

कथकली में वेश-भूषा का प्रतीकात्मक अर्थ

कथकली की प्रत्येक पोशाक और आभूषण का प्रतीकात्मक महत्व है:
  • बड़ा आकार → अलौकिक शक्ति
  • चमकीले रंग → नैतिक गुण
  • भारी आभूषण → गौरव और अधिकार
इस प्रकार कथकली की वेश-भूषा दृश्य भाषा के रूप में कार्य करती है।

कथकली और नृत्य से अधिक नाट्य

कथकली केवल नृत्य नहीं बल्कि एक पूर्ण नाट्य परंपरा है। इसमें:
  • संवाद नहीं होते
  • भाव आँखों, भौंहों और चेहरे से व्यक्त किए जाते हैं
  • संगीत और ताल बाहरी कलाकारों द्वारा दिया जाता है
इसलिए वेश-भूषा का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि वही पात्र की पहचान बनती है।

प्रशिक्षण और अनुशासन

कथकली कलाकार बनने के लिए:
  • वर्षों का कठोर प्रशिक्षण
  • शारीरिक और मानसिक साधना
  • मेकअप और वेश-भूषा सहन करने की क्षमता आवश्यक होती है। 
भारी स्कर्ट, जैकेट और हेडड्रेस पहनकर नृत्य करना अत्यंत कठिन होता है।

कथकली में रंग और रस

कथकली की वेश-भूषा भारतीय नाट्यशास्त्र के रस सिद्धांत से जुड़ी हुई है। 

विभिन्न रंग और पोशाक:
  • वीर रस
  • रौद्र रस
  • शांत रस
  • करुण रस को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ

कथकली का जन्म मंदिर परंपरा से जुड़ा है। प्रारंभ में यह:
  • मंदिरों में
  • धार्मिक उत्सवों में
  • रात्रि भर चलने वाले नाटकों में प्रस्तुत किया जाता था। 
भव्य वेश-भूषा का उद्देश्य देवताओं की महिमा को दर्शाना था।

कथकली और दर्शक

कथकली की वेश-भूषा दर्शकों को:
  • तुरंत आकर्षित करती है
  • पात्रों को पहचानने में मदद करती है
  • कथा को समझने में सहायक होती है
यह नृत्य दृश्य प्रभाव के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है।

आधुनिक समय में कथकली

आज भी कथकली:
  • अंतरराष्ट्रीय मंचों पर
  • सांस्कृतिक उत्सवों में
  • शैक्षणिक संस्थानों में उसी पारंपरिक वेश-भूषा के साथ प्रस्तुत की जाती है। 
यही इसकी शास्त्रीयता की पहचान है।

कथकली की वैश्विक पहचान

कथकली की चित्रित मुखाकृति, बड़ी स्कर्ट और लंबे हेडड्रेस ने इसे:
  • विश्व के सबसे विशिष्ट नृत्य रूपों में शामिल किया
  • भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधि बनाया
  • विदेशी दर्शकों के बीच लोकप्रिय किया

कथकली वेश-भूषा : कला और शिल्प का संगम

कथकली की पोशाक केवल नृत्य से जुड़ी नहीं बल्कि:
  • शिल्प
  • चित्रकला
  • वस्त्रकला का अद्भुत उदाहरण है। 
इसे तैयार करने में कई कारीगरों की कला झलकती है।

कथकली और भारतीय पहचान

कथकली भारत की उस सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है जिसमें:
  • भव्यता
  • प्रतीकात्मकता
  • आध्यात्मिकता एक साथ समाहित होती हैं।

कथकली बनाम अन्य शास्त्रीय नृत्य

जहाँ अन्य शास्त्रीय नृत्यों में सौम्यता और सरलता दिखाई देती है वहीं कथकली:
  • अत्यंत भव्य
  • भारी
  • नाटकीय स्वरूप प्रस्तुत करता है। 
यही इसे विशिष्ट बनाता है।

कथकली का सौंदर्यशास्त्र

कथकली में सौंदर्य केवल चेहरे या गति में नहीं बल्कि:
  • वेश-भूषा
  • रंगों
  • आभूषणों
  • हेडड्रेस के सामूहिक प्रभाव में निहित है।

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