परंतु इतिहास का यह विडंबनापूर्ण पक्ष है कि इतने महान विद्वान की मृत्यु राजनीतिक षड्यंत्र और सत्ता-संघर्ष का शिकार बन गई। सन् 1602 ईस्वी में अबुल फ़ज़ल की हत्या वीर सिंह देव बुंदेला द्वारा कर दी गई। यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी बल्कि मुग़ल दरबार की आंतरिक राजनीति, अकबर और उसके पुत्र सलीम (जहाँगीर) के तनावपूर्ण संबंधों तथा राजपूत-मुग़ल संबंधों की जटिलताओं का द्योतक थी।
अबुल फ़ज़ल: जीवन और व्यक्तित्व
अबुल फ़ज़ल का जन्म 1551 ईस्वी में आगरा के निकट हुआ था। वे एक विद्वान परिवार से संबंध रखते थे। उनके पिता शेख मुबारक स्वयं एक महान शिक्षाविद और इस्लामी धर्मशास्त्र के ज्ञाता थे। अबुल फ़ज़ल ने कम आयु में ही अरबी, फ़ारसी, दर्शन, इतिहास और धर्मशास्त्र में असाधारण दक्षता प्राप्त कर ली।
उनकी विद्वत्ता और बौद्धिक क्षमता ने उन्हें शीघ्र ही मुग़ल दरबार में प्रतिष्ठित स्थान दिलाया। वे सम्राट अकबर के अत्यंत निकट माने जाते थे और अकबर की धार्मिक सहिष्णुता, दीन-ए-इलाही जैसी नीतियों के वैचारिक समर्थक थे।
अकबरनामा: एक महान ऐतिहासिक ग्रंथ
अबुल फ़ज़ल की सबसे प्रसिद्ध कृति अकबरनामा है। यह ग्रंथ तीन भागों में विभाजित है:
- पहला भाग – अकबर के पूर्वजों और तैमूरी वंश का इतिहास
- दूसरा भाग – अकबर के शासनकाल की राजनीतिक, सैन्य और प्रशासनिक घटनाएँ
- तीसरा भाग (आईन-ए-अकबरी) – मुग़ल प्रशासन, राजस्व व्यवस्था, सामाजिक जीवन, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहलुओं का विस्तृत विवरण
अकबरनामा केवल घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण नहीं है बल्कि यह अकबर के शासन-दर्शन और साम्राज्य की संरचना को समझने का सबसे प्रामाणिक स्रोत माना जाता है।
अबुल फ़ज़ल और अकबर का संबंध
अबुल फ़ज़ल अकबर के केवल इतिहासकार नहीं थे बल्कि वे उसके मुख्य विचारक और सलाहकार भी थे। अकबर की धार्मिक सहिष्णुता, सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण और उदार प्रशासनिक नीतियों के पीछे अबुल फ़ज़ल की बौद्धिक भूमिका मानी जाती है।
इसी कारण वे कई परंपरावादी और कट्टरपंथी दरबारी अमीरों की आँखों की किरकिरी बन गए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि अकबर के पुत्र सलीम (भविष्य के जहाँगीर) भी अबुल फ़ज़ल को अपना राजनीतिक विरोधी मानते थे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: अकबर और सलीम का संघर्ष
अकबर के जीवनकाल में ही राजकुमार सलीम ने सत्ता प्राप्ति की आकांक्षा में कई बार विद्रोह किया। सलीम को लगता था कि अबुल फ़ज़ल अकबर को उसके विरुद्ध भड़काते हैं और अकबर को उत्तराधिकार के प्रश्न पर कठोर बनाए रखते हैं।
अबुल फ़ज़ल की बढ़ती शक्ति और प्रभाव से सलीम असंतुष्ट था। उसने निश्चय किया कि सत्ता के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा को हटाना आवश्यक है और वह बाधा अबुल फ़ज़ल थे।
वीर सिंह देव बुंदेला: परिचय
वीर सिंह देव बुंदेला बुंदेलखंड के प्रसिद्ध राजपूत शासक थे और ओरछा राज्य से संबंधित थे। वे साहसी, महत्वाकांक्षी और कुशल योद्धा माने जाते थे। मुग़ल सत्ता के साथ उनके संबंध समय-समय पर तनावपूर्ण रहे।
सलीम ने अपनी राजनीतिक चाल में वीर सिंह देव बुंदेला को मोहरा बनाया। उसने उन्हें आश्वासन दिया कि यदि वे अबुल फ़ज़ल की हत्या कर देंगे तो भविष्य में उन्हें मुग़ल सत्ता का संरक्षण और पुरस्कार मिलेगा।
अबुल फ़ज़ल की हत्या (1602 ई.)
1602 ईस्वी में अबुल फ़ज़ल दक्षिण भारत से लौटते समय मध्य भारत के क्षेत्र से गुजर रहे थे। उसी दौरान वीर सिंह देव बुंदेला ने घात लगाकर उन पर आक्रमण किया। इस षड्यंत्र में अबुल फ़ज़ल की नृशंस हत्या कर दी गई।
इतिहासकारों के अनुसार, अबुल फ़ज़ल का सिर काटकर सलीम के पास भेजा गया जिससे सलीम को यह प्रमाण मिल सके कि उसका आदेश पूरा हुआ है। यह घटना मुग़ल इतिहास की सबसे दुखद और विवादास्पद घटनाओं में से एक मानी जाती है।
अकबर की प्रतिक्रिया
अबुल फ़ज़ल की मृत्यु का समाचार सुनकर अकबर अत्यंत शोकाकुल हो गए। उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी क्षति माना। अकबर ने वीर सिंह देव बुंदेला को दंडित करने का विचार किया परंतु राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की अनिश्चितताओं के कारण वे कठोर कदम नहीं उठा सके। यह घटना अकबर और सलीम के संबंधों में और अधिक दरार का कारण बनी।
जहाँगीर का सत्ता में आगमन और परिणाम
अकबर की मृत्यु के बाद सलीम जहाँगीर के नाम से मुग़ल सम्राट बना। सत्ता प्राप्ति के बाद जहाँगीर ने वीर सिंह देव बुंदेला को पुरस्कृत किया और उन्हें जागीरें प्रदान कीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि अबुल फ़ज़ल की हत्या एक पूर्व नियोजित राजनीतिक षड्यंत्र थी।
इतिहास पर प्रभाव
अबुल फ़ज़ल की हत्या से:
- मुग़ल दरबार ने एक महान बुद्धिजीवी खो दिया
- इतिहास-लेखन की एक प्रगतिशील धारा बाधित हुई
- अकबर की उदार नीतियों को गहरा आघात पहुँचा
इसके बावजूद अकबरनामा आज भी मुग़ल इतिहास का सबसे विश्वसनीय और विस्तृत ग्रंथ माना जाता है।
