गुजरात को जीतकर किसने उसे दिल्ली सल्तनत में शामिल किया था?

गुजरात को जीतकर अलाउद्दीन खिलजी ने उसे दिल्ली सल्तनत में शामिल किया था। मध्यकालीन भारतीय इतिहास में दिल्ली सल्तनत का काल अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस काल में भारत में राजनीतिक एकीकरण, प्रशासनिक सुधार, सैन्य विस्तार तथा आर्थिक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों में अलाउद्दीन खिलजी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वह एक शक्तिशाली, महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी शासक था जिसने न केवल उत्तरी भारत में बल्कि पश्चिमी और दक्षिणी भारत में भी सल्तनत की सीमाओं का व्यापक विस्तार किया। 

गुजरात को जीतकर अलाउद्दीन खिलजी ने उसे दिल्ली सल्तनत में शामिल किया था।

अलाउद्दीन खिलजी की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धियों में से एक गुजरात विजय थी। गुजरात को जीतकर उसने उसे दिल्ली सल्तनत में शामिल किया। यह विजय केवल एक सैन्य अभियान नहीं थी बल्कि इसके दूरगामी राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिणाम हुए।

अलाउद्दीन खिलजी: परिचय

अलाउद्दीन खिलजी का वास्तविक नाम अली गुरशास्प था। वह खिलजी वंश का दूसरा और सबसे शक्तिशाली सुल्तान था। उसने 1296 ई. में अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी की हत्या करके सत्ता प्राप्त की। सत्ता में आने के बाद उसका मुख्य उद्देश्य था:
  • सल्तनत की सीमाओं का विस्तार
  • विद्रोहों का दमन
  • आर्थिक सुधारों के माध्यम से सेना को सुदृढ़ बनाना
  • मंगोल आक्रमणों से भारत की रक्षा करना
इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसने एक आक्रामक विस्तारवादी नीति अपनाई।

13वीं शताब्दी का गुजरात : राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति

अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण से पहले गुजरात एक समृद्ध और शक्तिशाली क्षेत्र था। यहाँ वाघेला वंश का शासन था और उस समय के शासक थे कर्णदेव वाघेला।

गुजरात का महत्व

  • गुजरात उस समय भारत के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक था:
  • अरब सागर से लगे होने के कारण समुद्री व्यापार का केंद्र
  • मसालों, कपड़ों और कीमती वस्तुओं का प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र
  • पश्चिमी एशिया और अफ्रीका से व्यापारिक संपर्क
  • समृद्ध नगर, मंदिर और खजाने
इन्हीं कारणों से गुजरात दिल्ली सल्तनत के शासकों की दृष्टि में एक आकर्षक लक्ष्य बन गया।

गुजरात पर आक्रमण के कारण

आर्थिक कारण
  • अलाउद्दीन खिलजी को एक विशाल और स्थायी सेना की आवश्यकता थी। इसके लिए अपार धन चाहिए था। गुजरात के समृद्ध व्यापारिक नगर और मंदिर उसके लिए धन का बड़ा स्रोत बन सकते थे।
सामरिक कारण

गुजरात की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी। इसे जीतकर दिल्ली सल्तनत को:
  • पश्चिमी समुद्री मार्गों पर नियंत्रण
  • विदेशी व्यापार पर प्रभाव
  • विद्रोही शक्तियों पर निगरानी जैसे लाभ मिल सकते थे।
राजनीतिक कारण
  • गुजरात के स्वतंत्र शासक दिल्ली सल्तनत की शक्ति को चुनौती दे सकते थे। इसलिए उसे सल्तनत में शामिल करना आवश्यक समझा गया।
गुजरात अभियान की योजना
  • अलाउद्दीन खिलजी स्वयं दिल्ली में रहकर शासन करता रहा लेकिन उसने अपने दो कुशल सेनापतियों उलूग़ ख़ाँ और नुसरत ख़ाँ को गुजरात पर आक्रमण के लिए भेजा। यह अभियान 1299 ई. में प्रारंभ हुआ।

गुजरात पर आक्रमण और युद्ध की घटनाएँ

अचानक हमला
  • दिल्ली सल्तनत की सेना ने अत्यंत सुनियोजित ढंग से गुजरात पर आक्रमण किया। गुजरात की सेना इस आक्रमण के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी।
कर्णदेव वाघेला की पराजय
  • दिल्ली की सेनाओं के सामने कर्णदेव वाघेला टिक नहीं सका। वह अपनी पत्नी और पुत्री के साथ दक्षिण की ओर भाग गया। इस प्रकार गुजरात की राजधानी पर दिल्ली सल्तनत का अधिकार हो गया।

लूट और विजय

इस अभियान में:
  • समृद्ध नगरों की लूट हुई
  • मंदिरों और खजानों से अपार धन प्राप्त हुआ
  • कई बंदियों को दिल्ली लाया गया
इन्हीं बंदियों में एक था मलिक काफूर जो आगे चलकर अलाउद्दीन खिलजी का प्रमुख सेनापति बना।

गुजरात का दिल्ली सल्तनत में विलय

गुजरात विजय के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने उसे दिल्ली सल्तनत का प्रांत घोषित किया। वहाँ सल्तनत का प्रशासन स्थापित किया गया।

प्रशासनिक व्यवस्था
  • सुल्तान के प्रतिनिधि (अमीर) नियुक्त किए गए
  • कर प्रणाली लागू की गई
  • सेना की स्थायी टुकड़ियाँ तैनात की गईं
इस प्रकार गुजरात औपचारिक रूप से दिल्ली सल्तनत का अंग बन गया।

गुजरात विजय के परिणाम

आर्थिक सुदृढ़ता
  • गुजरात से प्राप्त धन के बल पर अलाउद्दीन खिलजी ने:
  • विशाल स्थायी सेना का गठन किया
  • बाजार नियंत्रण प्रणाली लागू की
  • अनाज और वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित कीं
सैन्य शक्ति में वृद्धि
  • गुजरात विजय से प्राप्त संसाधनों ने सल्तनत की सैन्य शक्ति को अत्यंत मजबूत बना दिया।
दक्षिण भारत अभियानों की नींव
  • गुजरात अभियान के दौरान प्राप्त अनुभव और सेनानायक (विशेषकर मलिक काफूर) ने आगे चलकर दक्षिण भारत के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दिल्ली सल्तनत का विस्तार

इस विजय से दिल्ली सल्तनत पहली बार समुद्री व्यापारिक क्षेत्रों तक पहुँची।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
  • गुजरात के दिल्ली सल्तनत में शामिल होने से:
  • विभिन्न संस्कृतियों का संपर्क हुआ
  • व्यापार और शहरीकरण को बढ़ावा मिला
  • प्रशासनिक भाषा और संस्थाओं का विस्तार हुआ
हालाँकि, प्रारंभिक वर्षों में स्थानीय जनता को भारी कर और कठोर शासन का सामना भी करना पड़ा।

ऐतिहासिक महत्व

गुजरात विजय को अलाउद्दीन खिलजी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाता है क्योंकि:
इससे सल्तनत की आर्थिक नींव मजबूत हुई
पश्चिमी भारत पर स्थायी नियंत्रण स्थापित हुआ
भविष्य के विस्तारवादी अभियानों का मार्ग प्रशस्त हुआ

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