कृष्ण छिद्र (Black hole) सिद्धांत को किसने प्रतिपादित किया था?

कृष्ण छिद्र (Black hole) सिद्धांत को किसने प्रतिपादित किया था?
कृष्ण छिद्र (Black hole) सिद्धांत को एस. चन्द्रशेखर ने प्रतिपादित किया था। ब्रह्माण्ड रहस्यों से भरा हुआ है। तारों, आकाशगंगाओं, निहारिकाओं और अति-ऊर्जावान घटनाओं के बीच कृष्ण छिद्र (Black Hole) आधुनिक खगोलभौतिकी का सबसे रोमांचक और चुनौतीपूर्ण विषय है। कृष्ण छिद्र ऐसे खगोलीय पिंड हैं जिनका गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल होता है कि उनसे प्रकाश तक बाहर नहीं निकल पाता। मानव इतिहास में यह अवधारणा धीरे-धीरे विकसित हुई। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से लेकर आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत तक। इस विकास-यात्रा में भारतीय मूल के महान वैज्ञानिक सुबरमण्यन चन्द्रशेखर (एस. चन्द्रशेखर) का योगदान मील का पत्थर सिद्ध हुआ। उन्होंने तारों के विकास, उनके अंतिम चरण और अत्यधिक संकुचन की सैद्धान्तिक सीमाओं को स्पष्ट किया जिसने कृष्ण छिद्र सिद्धांत की नींव को वैज्ञानिक मजबूती प्रदान की। कृष्ण छिद्र की अवधारणा का ऐतिहासिक विकास कृष्ण छिद्र का विचार एकदम से नहीं आया। 18वीं शताब्दी में जॉन मिशेल और पियरे-साइमोन लाप्लास ने “डार्क स्टार” की कल्पना की थी। यानी कि ऐसे पिंड जिनसे प्रकाश निकल न सके। 20वीं शताब्दी में अल्बर्ट…