हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
मछली के हृदय की संरचना
मछली के हृदय में मुख्यतः दो कक्ष होते हैं—
- अलिंद (Atrium)
- निलय (Ventricle)
अलिंद पतली दीवार वाला होता है जो शरीर से लौटे अशुद्ध (ऑक्सीजन-रहित) रक्त को ग्रहण करता है। यह रक्त आगे निलय में पहुँचता है। निलय मोटी मांसपेशीय दीवार वाला होता है और रक्त को बलपूर्वक बाहर पंप करता है।
इसके अतिरिक्त, मछली के हृदय से जुड़े दो सहायक भाग भी होते हैं साइनस वेनोसस (Sinus venosus) और बुल्बस आर्टिरियोसस (Bulbus arteriosus) जो रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं परंतु इन्हें स्वतंत्र प्रकोष्ठ नहीं माना जाता।
रक्त संचार की प्रक्रिया
मछली में एकल परिसंचरण (Single Circulation) पाया जाता है। हृदय से निकला अशुद्ध रक्त सीधे गलफड़ों (Gills) में जाता है जहाँ वह ऑक्सीजन प्राप्त करता है। इसके बाद ऑक्सीजन-युक्त रक्त सीधे शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचता है। इस प्रकार मछली का हृदय केवल अशुद्ध रक्त को ही पंप करता है।
जलीय जीवन के लिए अनुकूलता
मछली का दो प्रकोष्ठीय हृदय उसकी ऊर्जा आवश्यकताओं और जलीय पर्यावरण के अनुकूल होता है। पानी में रहने के कारण मछलियों की चयापचय दर अपेक्षाकृत कम होती है इसलिए उन्हें उच्च दबाव वाले जटिल हृदय की आवश्यकता नहीं होती।
अन्य कशेरुकियों से तुलना
जहाँ मछलियों में दो प्रकोष्ठीय हृदय होता है वहीं उभयचरों में तीन प्रकोष्ठीय और पक्षियों व स्तनधारियों में चार प्रकोष्ठीय हृदय पाया जाता है। यह क्रमिक विकास (Evolution) को दर्शाता है जिसमें हृदय की संरचना अधिक जटिल और कुशल होती गई।
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