हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
श्वेत रक्त कोशिकाओं का महत्व
श्वेत रक्त कोशिकाएँ शरीर में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और अन्य रोगजनकों की पहचान कर उनसे लड़ती हैं। ये कोशिकाएँ शरीर की रक्षा सेना की तरह कार्य करती हैं और संक्रमण के समय सक्रिय होकर रोग को फैलने से रोकती हैं।
श्वेत रक्त कोशिकाओं के प्रकार और कार्य
श्वेत रक्त कोशिकाएँ कई प्रकार की होती हैं जिनके कार्य अलग-अलग होते हैं:
- न्यूट्रोफिल (Neutrophils): ये सबसे पहले संक्रमण स्थल पर पहुँचकर बैक्टीरिया को नष्ट करती हैं।
- लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes): ये एंटीबॉडी बनाकर वायरस और अन्य रोगाणुओं से लड़ते हैं तथा शरीर में रोग प्रतिरोधक स्मृति विकसित करते हैं।
- मोनोसाइट्स (Monocytes): ये बड़े रोगाणुओं और मृत कोशिकाओं को निगलकर साफ करते हैं।
- ईओसिनोफिल और बेसोफिल (Eosinophils & Basophils): ये एलर्जी और परजीवी संक्रमण से रक्षा में सहायक होते हैं।
रोग प्रतिरोधक प्रणाली में भूमिका
श्वेत रक्त कोशिकाएँ केवल रोगाणुओं को नष्ट ही नहीं करतीं बल्कि शरीर को भविष्य के संक्रमणों के लिए तैयार भी करती हैं। टीकाकरण (Vaccination) के बाद शरीर में प्रतिरक्षा विकसित होना श्वेत रक्त कोशिकाओं की ही देन है।
श्वेत रक्त कोशिकाओं की कमी के प्रभाव
यदि शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाए तो व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण साधारण संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार श्वेत रक्त कोशिकाओं को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
