भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में कौन कौन से दो मौलिक पहलू होते है?

भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में कौन कौन से दो मौलिक पहलू होते है?
हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”!  🎉  जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है। भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में लास्य और तांडव दो मौलिक पहलू होते है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और दार्शनिक आधारों पर टिकी हुई है। इसका मूल स्रोत भरतमुनि का नाट्यशास्त्र माना जाता है जिसमें नृत्य, नाट्य और संगीत के सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसी ग्रंथ में नृत्य के दो प्रमुख और मौलिक पहलुओं लास्य और तांडव का उल्लेख किया गया है। ये दोनों तत्व न केवल नृत्य की शैली को परिभाषित करते हैं बल्कि भाव, रस और अभिव्यक्ति के संतुलन को भी स्थापित करते हैं। लास्य: कोमलता और सौंदर्य की अभिव्यक्ति लास्य नृत्य का वह पक्ष है जो कोमलता, माधुर्य, सौंदर्य और सौम्यता को दर्शाता है। इसका संबंध प्रायः देवी पार्वती से जोड़ा जाता है। लास्य में शरीर की गतियाँ मृदु होती हैं, भंगिमाएँ सुकोमल होती हैं और चेहरे के भाव प्रेम, करुणा, वात्सल्य तथा श्रृंगार रस को प्रकट करते हैं। लास्य प्रधान नृत्यों म…