शरीर के गतियों के माध्यम से अर्थ को संवहन करने के रूप को किस अभिनय के नाम से जाना जाता है?
शरीर के गतियों के माध्यम से अर्थ को संवहन करने के रूप को किस अभिनय के नाम से जाना जाता है?
हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है। शरीर के गतियों के माध्यम से अर्थ को संवहन करने के रूप को आंगिक अभिनय के नाम से जाना जाता है। भारतीय नाट्य और नृत्य परंपरा में अभिनय का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जब कलाकार शरीर की गतियों के माध्यम से अर्थ का संवहन करता है तो इस रूप को आंगिक अभिनय कहा जाता है। यह अभिनय का वह स्वरूप है जिसमें शब्दों के बिना भी भाव, विचार और कथा दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाई जाती है। आंगिक अभिनय की अवधारणा आंगिक अभिनय की परिकल्पना और उसका शास्त्रीय विवेचन प्राचीन भारतीय ग्रंथ नाट्यशास्त्र में मिलता है जिसके रचयिता भरत मुनि माने जाते हैं। नाट्यशास्त्र के अनुसार अभिनय चार प्रकार का होता है - आंगिक, वाचिक, आहार्य और सात्त्विक। इनमें आंगिक अभिनय सबसे आधारभूत माना गया है क्योंकि यह सीधे शरीर की भाषा से जुड़ा होता है। शरीर ही भाषा आंगिक अभिनय में शरीर के विभिन्न अंग - हाथ (हस्त), पैर (पद), आँखें (नेत्र), भौहें, गर्दन, कंधे औ…