हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
हीरा और कार्बन का संबंध
रासायनिक दृष्टि से हीरे का संघटन केवल कार्बन के परमाणुओं से होता है। हीरे में किसी अन्य तत्व या यौगिक की उपस्थिति नहीं होती। इसी कारण खनिज विज्ञान में हीरे को कार्बन का अपरूप (Allotrope) माना जाता है। कार्बन के अन्य अपरूपों में ग्रेफाइट और कोयला भी शामिल हैं किंतु उनकी भौतिक विशेषताएँ हीरे से पूर्णतः भिन्न होती हैं।
क्रिस्टलीय संरचना और कठोरता
हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं से मजबूत सहसंयोजक बंधों (Covalent Bonds) द्वारा जुड़ा होता है। यह बंधन एक त्रि-आयामी जाल (Three-dimensional lattice) का निर्माण करता है जो हीरे को अत्यधिक कठोर, उच्च गलनांक वाला, अत्यंत स्थायी बनाता है। यही विशिष्ट संरचना हीरे को अन्य सभी खनिजों से अलग पहचान देती है।
ग्रेफाइट और हीरे में अंतर
हालाँकि हीरा और ग्रेफाइट दोनों ही कार्बन से बने होते हैं फिर भी:
- ग्रेफाइट में कार्बन परमाणु परतों के रूप में जुड़े होते हैं इसलिए वह मुलायम होता है।
- हीरे में कार्बन परमाणु सभी दिशाओं में दृढ़ता से जुड़े होते हैं इसलिए वह अत्यंत कठोर होता है।
यह अंतर स्पष्ट करता है कि केवल रासायनिक संघटन नहीं बल्कि आंतरिक संरचना भी किसी पदार्थ के गुणों को निर्धारित करती है।
प्राकृतिक एवं कृत्रिम हीरा
प्राकृतिक हीरा पृथ्वी के अंदर अत्यधिक दाब और ताप की परिस्थितियों में बनता है। आज वैज्ञानिक विधियों द्वारा कृत्रिम हीरे भी बनाए जाते हैं जिनकी संरचना और संघटन प्राकृतिक हीरे के समान ही अर्थात् शुद्ध कार्बन होता है।
