ग्रह गति (Planetary Motion) का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया था?

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ग्रह गति (Planetary Motion) का सिद्धांत कोप्लर ने प्रतिपादित किया था। खगोल विज्ञान के इतिहास में ग्रहों की गति को वैज्ञानिक आधार पर समझाने का श्रेय जर्मन खगोलशास्त्री जोहान्स केप्लर को जाता है। उन्होंने ग्रहों की वास्तविक गति का गहन अध्ययन कर ग्रह गति (Planetary Motion) के सिद्धांत प्रतिपादित किए जिन्हें आज केप्लर के ग्रह गति के नियम कहा जाता है। इन नियमों ने सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति की सही व्याख्या प्रस्तुत की।

ग्रह गति (Planetary Motion) का सिद्धांत कोप्लर ने प्रतिपादित किया था।

केप्लर का योगदान

केप्लर ने डेनमार्क के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री टाइको ब्राहे द्वारा संकलित प्रेक्षणात्मक आँकड़ों का विश्लेषण किया। इन सटीक प्रेक्षणों के आधार पर उन्होंने यह सिद्ध किया कि ग्रहों की गति सरल वृत्तीय नहीं बल्कि एक विशिष्ट गणितीय नियम का पालन करती है।

केप्लर के ग्रह गति के तीन नियम

प्रथम नियम (कक्षा का नियम)

प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) कक्षा में गति करता है और सूर्य उस दीर्घवृत्त के एक फोकस पर स्थित होता है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि ग्रहों की कक्षाएँ पूर्ण वृत्त नहीं होतीं।

द्वितीय नियम (क्षेत्रफल का नियम)

ग्रह और सूर्य को जोड़ने वाली रेखा समान समयांतराल में समान क्षेत्रफल तय करती है। अर्थात् ग्रह सूर्य के निकट होने पर तेज और दूर होने पर धीमी गति से चलता है।

तृतीय नियम (आवर्तकाल का नियम)

किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग उसकी कक्षा की अर्ध-दीर्घ-अक्ष (सूर्य से औसत दूरी) के घन के समानुपाती होता है। यह नियम ग्रहों की दूरी और उनकी गति के बीच गणितीय संबंध स्थापित करता है।

ग्रह गति सिद्धांत का महत्व

केप्लर के नियमों ने:
  • सौरमंडल की संरचना को स्पष्ट किया
  • ग्रहों की भविष्यवाणी योग्य गति संभव बनाई
  • आगे चलकर न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत का आधार तैयार किया

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