वाइरोलॉजी (Virology) में किसका अध्ययन किया जाता है?

वाइरोलॉजी (Virology) में किसका अध्ययन किया जाता है?
वाइरोलॉजी (Virology) में विषाणुओं (Virus) का अध्ययन किया जाता है। विषाणु ऐसे सूक्ष्म जैविक कण हैं जो जीवित और निर्जीव के बीच की कड़ी माने जाते हैं। ये न तो पूर्णतः जीवित होते हैं और न ही पूर्णतः निर्जीव क्योंकि इनमें जीवन की कुछ विशेषताएँ तो पाई जाती हैं परंतु स्वतंत्र रूप से ये जीवन क्रियाएँ नहीं कर सकते। वाइरोलॉजी का उद्देश्य विषाणुओं की संरचना, उत्पत्ति, वर्गीकरण, संक्रमण की प्रक्रिया, रोगजनक क्षमता, प्रतिरक्षा तंत्र से उनका संबंध तथा उनके नियंत्रण व उपचार का अध्ययन करना है। आज के आधुनिक युग में जब वैश्विक स्तर पर वायरल रोगों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है तब वाइरोलॉजी का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। चिकित्सा विज्ञान, पशु चिकित्सा, कृषि, जैव-प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण विज्ञान सभी क्षेत्रों में वाइरोलॉजी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वाइरोलॉजी का ऐतिहासिक विकास वाइरोलॉजी का विकास अपेक्षाकृत नया है किंतु इसका प्रभाव अत्यंत व्यापक है। 19वीं शताब्दी के अंत में वैज्ञानिकों ने यह समझना प्रारंभ किया कि कुछ रोग ऐसे हैं जिनका कारण न तो बैक्टीरिया हैं और न ही कोई अन्य ज्ञात सूक्ष्मजीव। सबसे पहले 189…