हर दिन सीखें कुछ नया — हर दिन मनाएं ज्ञान का “Happy New Year”! 🎉 जैसे नया साल नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है वैसे ही हमारा मानना है कि हर दिन सीखने के लिए एक नया अवसर होता है।
वृत्ताकार वलय की संरचना
वृत्ताकार वलय वह पिंड है जिसमें द्रव्यमान एक वृत्त की परिधि पर समान रूप से वितरित होता है। वलय की मोटाई नगण्य मानी जाती है और हर छोटे-छोटे द्रव्यमान तत्व (mass elements) वृत्त के चारों ओर समान दूरी पर स्थित होते हैं।
सममिति (Symmetry) के आधार पर विवेचना
वृत्ताकार वलय में पूर्ण घूर्णन सममिति पाई जाती है। इसका अर्थ है कि
- वलय के केंद्र से किसी भी दिशा में स्थित द्रव्यमान तत्व के ठीक विपरीत दिशा में समान द्रव्यमान का तत्व मौजूद होता है।
- ये विपरीत तत्व अपने-अपने गुरुत्वीय प्रभावों (या आघूर्णों) को एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं।
इस कारण वलय के केंद्र के अलावा किसी अन्य बिंदु पर कुल प्रभाव शून्य नहीं हो सकता।
गणितीय दृष्टि से समझना
यदि वलय को छोटे-छोटे द्रव्यमान तत्वों में बाँट दिया जाए तो प्रत्येक तत्व का द्रव्यमान केंद्र से समान दूरी पर होता है। केंद्र के सापेक्ष सभी तत्वों के आघूर्णों का सदिश योग शून्य हो जाता है। अतः द्रव्यमान केंद्र तथा गुरुत्व केंद्र दोनों वलय के ज्यामितीय केंद्र पर ही स्थित होते हैं।
प्रयोगात्मक प्रमाण
यदि किसी वृत्ताकार वलय को उसके केंद्र से सहारा देकर लटकाया जाए तो वह किसी भी दिशा में झुके बिना संतुलन में रहता है। यह व्यवहार इस तथ्य की पुष्टि करता है कि उसका गुरुत्व केंद्र उसी बिंदु पर है जहाँ से वह लटकाया गया है अर्थात् वलय का केंद्र।
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