पाण्ड्यों का उल्लेख सर्वप्रथम किस विदेशी यात्री ने किया था?

पाण्ड्यों का उल्लेख सर्वप्रथम किस विदेशी यात्री ने किया था?
पाण्ड्यों का उल्लेख सर्वप्रथम मार्कोपोलो ने किया था। भारत का प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास अनेक महान राजवंशों, समृद्ध संस्कृतियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों से परिपूर्ण रहा है। दक्षिण भारत में जिन राजवंशों ने दीर्घकाल तक शासन किया उनमें पाण्ड्य वंश का विशेष स्थान है। यह वंश न केवल राजनीतिक शक्ति का प्रतीक था बल्कि व्यापार, संस्कृति, साहित्य और समुद्री गतिविधियों में भी अग्रणी रहा। पाण्ड्यों की प्रसिद्धि भारत की सीमाओं से बाहर तक फैली हुई थी। इसी संदर्भ में यह ऐतिहासिक तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है कि पाण्ड्यों का उल्लेख सर्वप्रथम विदेशी यात्रियों में मार्को पोलो ने किया था। मार्को पोलो के यात्रा-वृत्तांतों ने पाण्ड्य साम्राज्य की समृद्धि, प्रशासन, व्यापारिक शक्ति और सामाजिक जीवन को विश्व पटल पर प्रस्तुत किया। उनका वर्णन न केवल ऐतिहासिक स्रोत है बल्कि मध्यकालीन दक्षिण भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति को समझने की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी है। पाण्ड्य वंश का संक्षिप्त परिचय पाण्ड्य वंश दक्षिण भारत के तीन प्राचीनतम तमिल राजवंशों चोल, चेर और पाण्ड्य में से एक था। इस वंश का शासन मुख्यतः वर्त…